
गढ़ाकोटा। नगर में रविवार से घटयात्रा के साथ पंच कल्याण महोत्सव की शुरुआत हुई। घटयात्रा की शुरुआत चौधरी जैन मंदिर से हुई। शोभायात्रा नगर के मुख्य मार्गों से होती हुई अयोध्या नगरी (गोपालजी खेल परिसर) पहुंची। 2 किमी लंबी यात्रा नगर में पहली बार लोगों को देखने मिली। घटयात्रा अयोध्या नगर (गोपालजी खेल परिसर) में पहुंचने के पश्चात् धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। मंच उद्घाटन पं. गोपाल भार्गव ने किया। चित्र अनावरण भी उन्हीं ने किया। मंगलाचरण पाठशाला की बहनों ने किया। शांतिधारा का सौभाग्य सोनू ऊमरा को प्राप्त हुआ। अंत में आभार कार्यक्रम के अध्यक्ष खेमचंद मील वालों ने व्यक्त किया। समारोह के दौरान सकल जैन समाज, सहारनपुर, रोहतक, दमोह, सागर पथरिया, शाहपुर, रहली सहित अन्य क्षेत्र के श्रद्घालु मौजूद थे।
धर्म का अवलम्बन साक्षात रूप से कर्मभूमि में ही प्राप्त होता है
ैः आचार्यश्री
घट्यात्रा समारोह पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री विद्यसागर सागर महाराज ने कहा कि भारत एक कर्मभूमि है। इस कर्मभूमि में वैराग्य और त्याग संभव होता है। कर्मभूमि में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति मानवमात्र सौभाग्यशाली होता है। अतः मानव का मूल्य कर्तव्य अन्यत्र कहीं भोगभूमि में या स्वर्ग में नहीं मिलता है। धर्म का अवलम्बन साक्षात् रूप से कर्मभूमि में ही प्राप्त होता है। महापुरूषों का जन्म कर्मभूमि में भी अयोध्या में होता है। भगवान राम भगवान, आदिनाथ भरत चक्रवर्ती जैसे महापुरूषों का जन्म अयोध्या में हुआ है। देव अधर में रहते हैं, मानव धरा पर रहते हैं। यहां मनुष्य लोक में श्रम और विश्राम दोनों का सामन्जस्य होता है। देवों में न श्रम है और न विश्राम। न उनके श्रम के बाद पसीना आता है न उनके धर्म की सार्थकता होती है। अतः धर्मधारी मानव को देव भी प्रणाम नमस्कार करते हैं। जिसका मन धर्म और दया में लगा रहता है वहीं मानवता को साकार कर पाता है। आचार्यश्री ने भारत और इंडिया का अंतर बताते हुए कहा कि भारत का अंग्रेजी अनुवाद कभी इंडिया नहीं हो सकता है भारत शब्द में संस्कृति और सभ्यता का बहुत बड़ा अर्थ छुपा हुआ है जबकि इंडिया शब्द में संस्कृति की शून्यता है। आदिनाथ के भरत के नाम को सार्थक करने के लिए भारत नाम श्रेष्ठ है। भारत की भूमि पूज्य है। अतः इंडिया के स्थान पर भारत का प्रयोग सभी प्रकार से उचित है।
धर्म पारमार्थिक कार्य की प्रेरणा देता है ..
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री पं. गोपाल भार्गव ने घटयात्रा समारोह के दौरान कहा कि गढ़ाकोटा के इतिहास में 250 वर्षों के अंतराल के बाद पंचकल्याणक महोत्सव हो रहा है जब कोई बेरियल खुलता है तो प्रवाह बहुत तीव्र होता है। जैन धर्म पारमार्थिक कार्य की प्रेरणा सभी धर्मजन को देता है। अपने लिए तो सब जीते हैं लेकिन परमार्थ के लिए गौ रक्षा के लिए जीने वाले व्यक्ति का जीवन सार्थक हो जाता है। जाति और पंथ के दायरे से बाहर निकलकर इस आयोजन को सफल बनाना हम सब का दायित्व है। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि यह कार्य सानंद निर्विघ्न संपन्न हो और मानवमात्र के लिए करूणा प्रेम का मार्ग प्रशस्त हो।