
नवदुनिया प्रतिनिधि, सागर। रिश्तों को तार-तार कर नाबालिग के साथ दुष्कर्म़ करने वाले आरोपितों को तृतीय अपर-सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) नीलम शुक्ला सागर की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपित पर अर्थदंड भी लगाया है। मामले की पैरवी प्रभारी उप-संचालक धर्मेन्द्र सिंह तारन के मार्गदर्शन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी रिपा जैन ने की।
घटना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि शिकायतकर्ता पीड़िता ने दिनांक 30 दिसंबर 2022 को महिला थाना जिला सागर में रिपोर्ट कराई कि उसके माता-पिता का करीब 15 वर्ष पहले देहांत हो जाने के लगभग तीन माह बाद वह एवं उसकी छोटी बहन उसकी बड़ी बहन आरोपित 'अ' के ससुराल में आरोपित के साथ रहने लगे और उसका बड़ा भाई भोपाल में रहने लगा था। बालिका की 12-13 वर्ष की आयु में उसके जीजा आरोपित ब के छोटे भाई ने पहली बार बालिका के साथ दुष्कर्म किया। इसके करीब 5-6 दिन बाद दूसरे आरोपित ने उसे धमकी देकर उसके साथ जबरन बुरा काम किया।
शादी से पहले तक करते रहे दुष्कर्म, गुजरात ले जाकर कराया प्रसव
इस घटना में पीड़िता के साथ दो आरोपित उसकी शादी के पहले तक उसके साथ बुरा काम करते रहे। बालिका उनका विरोध करती थी, लेकिन आरोपित नहीं मानते थे जिससे बालिका गर्भवती हो गई थी। इसके बाद आरोपित बालिका को लेकर गुजरात चले गए एवं जहां बालिका ने एक पुत्री को जन्म दिया। इसके बाद मार्च 2022 में वह बालिका को राहतगढ़ लेकर आए और आरोपितों ने उसे घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने एवं घर से भगाने की धमकी दी। इसलिए उसने यह बात किसी को नहीं बताई।
शादी के बाद पति ने दिया साथ और कराई रिपोर्ट
उसकी शादी के बाद उसने हिम्मत करके सारी बात उसके पति को बताई और उसके पति द्वारा उसका साथ देने पर उसने घटना की रिपोर्ट की। रिपोर्ट के आधार पर प्रकरण विवेचना में लिया गया और आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके मेमोरेडम कथन लेख कर उसके साथ षड़यंत्र कर अपराध करना पाया। पुलिस द्वारा उसका डीएनए परीक्षण कराया गया एवं संपूर्ण विवेचना के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया। अभियोजन ने अपना मामला संदेह से परे प्रमाणित किया, जिसके बाद कोर्ट ने भादवि की धारा- 376(3), 376(2)(एफ) के तहत आजीवन सश्रम कारावास एवं दो हजार रूपये अर्थदंड, धारा-506(भाग-2) भादवि के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक हजार रूपये अर्थदण्ड व पाक्सों एक्ट, 2012 की धारा- 5एल/6 व 5 (जे)(आई आई)/6, धारा-17 के तहत पृथक-पृथक धाराओं में आजीवन सश्रम कारावास एवं दो-दो हजार रूपये अर्थदण्ड की सजा से दंडित किया। न्यायालय ने निर्णय पारित करते समय यह टिप्पणी की कि समाज में बलात्संग का अपराध सबसे जघन्य अपराध में से एक है और एक सुरक्षित समाज तब होता है जब वह बलात्कार मुक्त हो। इन परिस्थितियों में आरोपितों को युक्तियुक्त रूप से कठोर दंड से दंडित करना न्यायोचित है।