नईदुनिया प्रतिनिधि, सागर। बुंदेलखंड की धरती अब पारंपरिक और रासायनिक खेती की रूढ़ियों को तोड़कर पूरी दुनिया को 'सस्टेनेबल फार्मिंग' यानी टिकाऊ खेती का नया पाठ पढ़ा रही है।
सागर जिले के बीना क्षेत्र में आयोजित इंडो-जर्मन कार्यशाला के तहत मंगलवार को एक बेहद दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जब कनाडा, जर्मनी और कैमरून जैसे देशों से आए चोटी के कृषि वैज्ञानिक यहां के एक छोटे से गांव गुलौआ में एकीकृत जैविक खेती का देसी मॉडल देखने पहुंचे।
विदेशी विशेषज्ञों ने न सिर्फ भारतीय पारंपरिक तकनीकों को सराहा, बल्कि आधुनिक कृषि यंत्रों के अनूठे संयोजन को देखकर भारत के किसानों का लोहा माना।
खेत का कचरा बना सोना; समझिए उमेश पटेल का आत्मनिर्भर मॉडल
कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ विदेशी मेहमान गुलौआ गांव के प्रगतिशील किसान उमेश पटेल के खेत पर पहुंचे। उमेश और उनका परिवार पिछले काफी समय से एकीकृत कृषि प्रणाली अपना रहा है, जिसने विदेशी वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा आकर्षित किया।
एक-दूसरे पर निर्भरता: इस मॉडल में फसल उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन (मछली), कुक्कुट (मुर्गी) पालन, बायोगैस और वर्मी कम्पोस्ट को आपस में इस तरह जोड़ा गया है कि बाहर से कुछ खरीदना ही नहीं पड़ता।
वेस्ट से वेल्थ का चक्र: खेत से निकलने वाला जैविक कचरा केंचुए की खाद (वर्मी कम्पोस्ट) बनता है, जबकि गाय-भैंसों के गोबर से पहले बायोगैस (रसोई ईंधन) बनती है और बचा हुआ स्लरी (वेस्ट) बेहतरीन खाद के रूप में खेतों में जाता है। इससे लागत न के बराबर हो जाती है और जमीन की सेहत सुधरती है।
मित्र कीट और सुपर सीडर... 3 घंटे तक बारीकियों को खंगालते रहे विदेशी वैज्ञानिक
कनाडा से आए जूलियन मेले, जर्मनी के हैंस क्लेन तथा कैमरून से आईं महिला वैज्ञानिक माईकल लाटा ने खेतों में करीब 3 घंटे का समय बिताया।
- वैज्ञानिकों ने बिना रसायनों के पैदा हो रही सब्जियों और फलों को देखा।
- उन्होंने खेतों में आधुनिक मशीन 'सुपर सीडर' के इस्तेमाल और पारंपरिक तरीकों के मेल को बारीकी से समझा।
- वैज्ञानिकों ने किसानों से चर्चा कर यह भी जाना कि बिना केमिकल छिड़के भारतीय किसान फसलों के 'मित्र कीटों' का उपयोग कर 'शत्रु कीटों' को प्राकृतिक तरीके से कैसे नष्ट करते हैं।
बीना में चल रही जैविक क्रांति; हर रविवार सजता है 'रसायन मुक्त' हाट
वरिष्ठ कृषि अधिकारी अवधेश राय के मुताबिक, बीना क्षेत्र में यह आंदोलन अब एक बड़े स्तर पर पहुंच चुका है।
2,000 एकड़ में सिर्फ ऑर्गेनिक: क्षेत्र के करीब डेढ़ से दो हजार एकड़ रकबे में किसान अब पूरी तरह जैविक खेती कर रहे हैं। इन किसानों की सुविधा और शहरी लोगों की सेहत के लिए कृषि विभाग ने विशेष 'जैविक हाट बाजार' की व्यवस्था कराई है, जहां हर रविवार को किसान बिना किसी रसायन या पेस्टिसाइड के उगाई गई अपनी ताजा सब्जियां बेचने आते हैं।
इस अंतर्राष्ट्रीय संवाद के दौरान क्षेत्र के प्रमुख जैविक कृषक भगवान सिंह पटेल, राजेंद्र यादव, राजाबाबू यादव और रौनक हुर्कट सहित कृषि विभाग के आला अफसर मौजूद रहे।