
नवदुनिया प्रतिनिधि, सागर। सिविल लाइन से मकरोनिया तक करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। इस सड़क का काम व्हाइट टाप तकनीक से हो रहा है। इसी बीच सड़क निर्माण को लेकर एक वीडिया इंटरनेट मीडिया पर तेजी से बहुप्रसारित हुआ, जिसमें एक युवक बनी हुई सड़क में पत्थर से लोहे का सरिया ठोकता नजर आ रहा है।
वीडियो सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर तरह तरह की बातें होने लगीं। हालांकि पीडब्ल्यूडी कार्यपालन यंत्री ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है।
सिविल लाइन से मकरोनिया सड़क शहर के प्रमुख और व्यस्त मार्गों में शामिल है। इस सड़क पर वाहनों का दबाव अधिक रहता है और रोजाना पांच हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क निर्माण में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पालन बेहद जरूरी है।
संबंधित निर्माण एजेंसी को सड़क में टाइ बार लगाने का प्रावधान नहीं है। सड़क को पूर्ण मानकों के साथ उच्च गुणवत्ता से बनाई जा रही है। यह सड़क डामर थी, जिसे हर तीन साल में रिपेयरिंग करना पड़ता है। व्हाइट टाप तकनीक से बनने के बाद सड़क को और मजबूती मिलेगी। प्रदीप लारिया, विधायक नरयावली।
वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा सरिया टाइ बार है। इसे लगाने में कोई गड़बड़ी नहीं है। टाइ बार दो हिस्सों को मजबूती देने के लिए उपयोग किए जाते हैं और कुछ स्थानों पर इनका उपयोग नहीं होने पर भी काम चल सकता है। संभव है कि किसी स्थान पर सरिया बाहर निकल गया हो, जिसे दोबारा लगाया जा रहा हो। सड़क निर्माण का काम इंजीनियरों की निगरानी और सुपरविजन में निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा रहा है। साहित्य तिवारी, पीडब्ल्यूडी कार्यपालन यंत्री (ईई)।
दो हिस्सों को जोड़ने के लिए होता है टाइ बार का उपयोग
व्हाइट टाप तकनीक में सड़क के कंक्रीट ब्लाक तैयार किए जाते हैं। सामान्य तौर पर प्रत्येक ब्लाक के निर्माण में सरिया का उपयोग नहीं होता, लेकिन सड़क के एक हिस्से को दूसरे हिस्से से जोड़ने के लिए टाइ बार का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य दोनों हिस्सों को आपस में जोड़ना और उनके बीच मजबूती बनाए रखने में मदद करना है। टाइ बार सड़क निर्माण के दौरान ही लगाए जाने चाहिए, ताकि अगले हिस्से की ढलाई के समय दोनों हिस्सों का जुड़ाव बेहतर हो सके। तैयार सड़क में बाद में सरिया लगाने से अपेक्षित मजबूती मिलने में दिक्कत आ सकती है। दिनकर तिवारी, सेवानिवृत्त इंजीनियर।
( इस मामले में निर्माण एजेंसी के जिम्मेदार राजेंद्र लोधी से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने मोबाइल नहीं उठाया।)