MP में श्रीराम वन गमन पथ में जोड़े जाएंगे 10 और स्थल, अब 25 की जगह 35 तीर्थों के दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु
मध्य प्रदेश से गुजरने वाले श्रीराम वन गमन पथ में अब 10 नए स्थल जुड़ेंगे। इनमें वे स्थान भी शामिल हैं, जहां श्रीराम अयोध्या का राजा बनने के बाद गए थे य...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 07 Apr 2026 07:16:14 PM (IST)Updated Date: Tue, 07 Apr 2026 07:16:14 PM (IST)
एमपी में श्रीराम वन गमन पथ का विस्तार।HighLights
- एमपी में श्रीराम वन गमन पथ का विस्तार
- अब 35 तीर्थों के दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु
- 10 नए ऐतिहासिक स्थल होंगे शामिल
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। मध्य प्रदेश से गुजरने वाले श्रीराम वन गमन पथ में अब 10 नए स्थल जुड़ेंगे। इनमें वे स्थान भी शामिल हैं, जहां श्रीराम अयोध्या का राजा बनने के बाद गए थे या उन्होंने तीर्थ दर्शन किए। श्रीराम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास के प्रबंध न्यासी व शोधकर्ता डॉ. रामअवतार का कहना है कि मध्य प्रदेश में अब तक श्रीराम वन गमन पथ पर 25 स्थल चिह्नित हुए हैं। 10 और बढ़ने से इनकी संख्या 35 हो जाएगी।
प्रदेश सरकार करा रही शोध
श्रीराम वन गमन पथ मार्ग के स्थलों को चिह्नित करने में जुटे डॉ. रामअवतार कहते हैं कि प्रदेश सरकार केवल अभी भगवान श्रीराम के पथ से जुड़े स्थलों पर शोध करवा रही है। अभी इस पर काम शुरू नहीं हुआ है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रीराम वन गमन पथ मार्ग में परिवर्तन कर कई स्थलों को निकाल दिया है। ऐसा ही प्रयास छत्तीसगढ़ सरकार ने भी किया था, लेकिन उन्होंने बाद में सुधार कर लिया।
48 वर्षों का शोध और भारत सरकार की मान्यता
बता दें, डॉ. रामअवतार रामायण परिपथ, पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार के अध्यक्ष भी हैं। डॉ. रामअवतार ने कई देशों में भगवान श्रीराम की यात्राओं पर शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं। वह 48 वर्षों से श्रीराम वन गमन पथ पर शोध कर रहे हैं। इसे भारत सरकार ने भी मान्यता दी है।
इन स्थलों की हो रही खोज
- उमरिया-कटनी जिले के बीच कहेंदुआ पहाड़ की तलाश है, जो महानदी के किनारे तैमूर पहाड़ से 15-20 किमी की दूरी पर दक्षिण में स्थित है। यह स्थान मार्कंडेय आश्रम के पास बताया जा रहा है। मान्यता है कि श्रीराम ने वनवास के दौरान इस पहाड़ पर कहेंदुआ राक्षस का वध किया था।
अनूपपुर-डिंडौरी के बीच रूसा गांव में भी श्रीराम रुके थे। यहां के भी एक स्थल की तलाश है।
सीधी-सिंगरौली जिले के बीच माड़ा और बैढ़न के पास का तीर्थमय पहाड़ है, जिसकी खोज हो रही है।
उमरिया-अनूपपुर जिले में दो और सीधी-सिंगरौली के एक स्थल की तलाश है, जहां भगवान कुछ दिन रुके थे। अभी तक ये 25 स्थल चिह्नित, सतना के सबसे ज्यादा
- सतना जिले के चित्रकूट में स्फटिक शिला, गुप्त गोदावरी, अत्रि आश्रम, शरभंग आश्रम, अश्वमुनि आश्रम, सिलहा गांव में सुतीक्ष्ण आश्रम, सिद्धा पहाड़, रक्सेला गांव में सीता रसोई और रामसेल।
- पन्ना में पहाड़ी खेरा गांव में बृहस्पति कुंड, सारंगधर गांव में सुतीक्ष्ण आश्रम, बड़े गांव में अग्निजिह्वा आश्रम और सलेहा में अगस्त्य आश्रम।
- मैहर जिले में राम जानकी मंदिर, कटनी जिले के भरभरा में शिव मंदिर, जबलपुर जिले में पिपरिया के पास रामघाट शामिल हैं।
- नर्मदापुरम में पासी घाट और माच्छा के राम मंदिर।
- बालाघाट जिले में राम पायली, मंडला में सीता रपटन।
- उमरिया जिले में राम मंदिर, दशरथ घाट और मार्कंडेय आश्रम, शहडोल के गंधिया में सीतामढ़ी और अनूपपुर के कनवाई में स्थित सीतामढ़ी।
यह भी पढ़ें- ग्वालियर में एक ही परिवार के 3 सदस्यों ने सागरताल तालाब में लगाई छलांग, एक की मौत, दो गंभीर रूप से घायल
इन स्थानों पर भगवान राम के पहुंचने की मान्यता
प्रभु श्रीराम और उनसे जुड़े प्रसंगों को लेकर मान्यता है कि चित्रकूट के कामदगिरि पर्वत, रामघाट और मंदाकिनी नदी से उनका गहरा जुड़ा रहा। कुछ कथाओं के अनुसार, श्रीराम ने नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक की यात्रा की थी। मध्य प्रदेश की सीमा से लगा महाराष्ट्र का रामटेक भी श्रीराम वन गमन पथ का हिस्सा है। मान्यता है कि यहां भी श्रीराम ने वनवास का कुछ समय बिताया था। इसके अलावा मंडला और अनेक नर्मदा तटों पर भी श्रीराम के पहुंचने और पूजन करने की बात कही जाती है।