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डकैत गए, बाघ आए! सतना के जंगलों में 20 टाइगरों का बसेरा, कई बाघिनों ने यहीं दिए शावकों को जन्म

सतना के चित्रकूट-मझगवां जंगल, जो कभी डकैतों का गढ़ थे, अब करीब 20 बाघों का सुरक्षित ठिकाना बन चुके हैं। संरक्षण प्रयासों और वन प्रबंधन से बड़ा बदलाव आ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Wed, 05 Aug 2026 10:01:29 PM (IST)Updated Date: Wed, 05 Aug 2026 10:01:29 PM (IST)
डकैत गए, बाघ आए! सतना के जंगलों में 20 टाइगरों का बसेरा, कई बाघिनों ने यहीं दिए शावकों को जन्म
सतना के जंगलों में 20 टाइगरों का बसेरा। (एआई जनरेटेड)

HighLights

  1. डकैतों के खात्मे से जंगलों में वन संरक्षण मजबूत हुआ।
  2. चित्रकूट-मझगवां क्षेत्र में अब करीब 20 बाघों की मौजूदगी है।
  3. पन्ना टाइगर रिजर्व से बाघों ने नया सुरक्षित ठिकाना चुना।

शिवम कृष्ण त्रिपाठी, नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। बीहड़ स्थित चित्रकूट-मझगवां-सरभंगा के जंगल दो दशक पहले तक ददुआ, ठोकिया और दूसरे डकैत गिरोहों के खौफ से पहचाने जाते थे। बंदूकों की गूंज सुनाई देती थी, लेकिन अब तस्वीर बदल गई है।

अब यहां बाघों की दहाड़ सुनाई दे रही है। यहां दस्यु उन्मूलन से पहले पन्ना के जंगलों से भटककर कभी-कभार कोई बाघ पहुंचता था, पर ठहर नहीं पाता था। डकैत गिरोहों के खात्मे के बाद वन विभाग की सक्रिय गश्त, शिकार पर नियंत्रण और संरक्षण के प्रयासों ने जंगल का माहौल बदल दिया है।

बाघों ने चित्रकूट-मझगवां के जंगलों को बनाया नया घर

पन्ना टाइगर रिजर्व में बढ़ती बाघों की आबादी के साथ कई बाघों ने चित्रकूट-मझगवां के घने जंगलों का रुख किया। भरपूर शिकार, जलस्रोत और सुरक्षित वन कारिडोर ने इन्हें नया घर दे दिया है। आज इस क्षेत्र में करीब 20 बाघों की मौजूदगी दर्ज है। कई बाघिन यहां शावकों को जन्म दे चुकी हैं।


2009 से हुई बदलाव की शुरुआत

  • चित्रकूट–मझगवां–पाठा का जंगल 70 के दशक से लेकर 2007-08 तक डकैतों का प्रमुख ठिकाना रहा। इस दौरान ददुआ, ठोकिया, घनश्याम केवट, बबुली कोल और कई अन्य गिरोह चित्रकूट, सतना, बांदा और आसपास के जंगलों में सक्रिय रहे। लिहाजा चित्रकूट, मझगवां व पाठा के जंगलों में बाघों के संरक्षण के प्रयास, बेहतर वन प्रबंधन और पौधारोपण जैसे काम नहीं हो पाते थे।
  • बदलाव की शुरुआत वर्ष 2009 के बाद हुई, जब पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापना परियोजना सफल रही। वहां बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी तो युवा बाघों ने नए इलाकों की तलाश शुरू की। पन्ना से जुड़े मझगवां, सरभंगा तथा धारकुंडी के जंगल उनके लिए स्वाभाविक कारिडोर बन गए।

छत्तीसगढ़-मप्र और उप्र के बीच बनेगा नया बाघ कारिडोर

राज्य सरकार भी प्रदेश में बढ़ती बाघों की संख्या के मद्देनजर नए कारिडोर को विकसित करने पर विचार कर रही है। पिछले दिनों बांधवगढ़ व संजय टाइगर रिजर्व से लेकर छत्तीसगढ़ के अचानकमार जैसे करीब चार नए कारिडोर को लेकर बैठक भी हो चुकी है। पन्ना-सतना, उप्र के रानीपुर टाइगर रिजर्व के बीच नया कारिडोर तैयार करने पर भी मंथन चल रहा है।

फैक्ट फाइल

  • 1970 के दशक में चित्रकूट-पाठा-मझगवां क्षेत्र में डकैत गिरोहों का प्रभाव बढ़ा।
  • 22 जुलाई 2007 में कुख्यात डकैत शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।
  • 04 अगस्त 2008 में कुख्यात डकैत अंबिका प्रयास पटेल उर्फ ठोकिया के एनकाउंटर के साथ संगठित डकैत गिरोहों का तेजी से पतन हुआ।
  • 2015 के बाद से मझगवां-सरभंगा क्षेत्र में बाघों की स्थायी मौजूदगी दर्ज होना शुरू हुई।

पन्ना में बाघों की संख्या बढ़ी

डकैतों की मौजूदगी की वजह से जंगलों में गश्त आदि में दिक्कतें होती थीं। पन्ना में बाघों की संख्या बढ़ी, तो बरौंधा व मझगवां रेंज में भी बाघों की संख्या बढ़ रही है। राजेंद्र सिंह, डिप्टी रेंजर

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