
नईदुनिया प्रतिनिधि, मैहर। जिले के मैहरवनमंडल अंतर्गत आने वाले अमरपाटन वन परिक्षेत्र की गोरसरी पहाड़ी में पिछले 17 दिन से डेरा डाले जंगली हाथी ई-5 (सी-4) को पकड़ने के लिए बुधवार रात वन विभाग ने बड़ा रेस्क्यू अभियान चलाया।
बांधवगढ़ से लाए गए छह कुमकी हाथियों की मदद से जंगली हाथी की घेराबंदी की गई, लेकिन वह लगातार रेस्क्यू दल को चकमा देता रहा।
देर रात तक चले अभियान के बावजूद हाथी को सुरक्षित पकड़ने में सफलता नहीं मिली। इधर गुरुवार को दोपहर से शुरु हुई बारिश कि वजह से रेस्क्यू कार्य पुन: प्रभावित होता रहा और दूसरे दिन भी वन विभाग को रेस्क्यू बंद करना पड़ा।
उपवनमंडलाधिकारी दीपांकर सिद्धार्थ बताते हैं कि ई-5 का रेस्क्यू कब तक किया जाएगा या कितना समय लगेगा। इस पर कुछ कह पाना मुश्किल है। उसे ट्रैकुंलाइज करने के बाद ही कुछ कह पाना भी संभव होगा।
अभियान में मैहर वन मंडल के अलावा अमरपाटन, मुकुंदपुर और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की टीमें शामिल रहीं। करीब 150 वनकर्मी और पुलिस बल को तैनात किया गया था। अभियान की निगरानी डीएफओ विद्या भूषण मिश्रा, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय, डिप्टी डायरेक्टर युहान कटारा, मैहर एसडीओ सिद्धार्थ दीपांकर और रेंजर प्रफुल्ल त्रिपाठी ने की।
वन विभाग की टीम ने गोरसरी पहाड़ी के आसपास घेराबंदी कर छह कुमकी हाथियों की मदद से ई-5 को चारों ओर से घेरने का प्रयास किया। जंगली हाथी लगातार अपनी दिशा बदलता रहा और रेस्क्यू टीम की पकड़ से बाहर निकलता रहा। इसके चलते देर रात तक अभियान चलता रहा, लेकिन हाथी को काबू नहीं किया जा सका।
रेस्क्यू के दौरान गोरसरी, रामनगर और अमरपाटन मार्ग पर बैरिकेडिंग की गई। हाथी के अचानक मुख्य मार्ग पर आने की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों और वाहन चालकों की आवाजाही पर भी निगरानी रखी गई। वन विभाग ने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की थी।
उल्वलेखनीय है कि वन विभाग के अनुसार ई-5 (सी-4) 7-8 सितंबर की रात बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से निकला था। उसने बाणसागर बांध के पास करीब पांच किलोमीटर लंबे जलमार्ग को तैरकर पार किया और अमरपाटन वन क्षेत्र में पहुंच गया।
मैहर क्षेत्र में पहुंचने के बाद मौहारी गांव के ग्रामीण कंछेदी यादव की हाथी के हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद से वन विभाग लगातार उसकी निगरानी कर रहा है और उसे सुरक्षित पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। बुधवार रात का अभियान भी इसी क्रम में चलाया गया, लेकिन हाथी फिर पकड़ से बाहर रहा।
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