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मैहर में छह कुमकी दल ने घेरा फिर भी चकमा दे गया हाथी ई-5, बारिश बनी रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा

मैहर क्षेत्र में पहुंचने के बाद मौहारी गांव के ग्रामीण कंछेदी यादव की हाथी के हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद से वन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 24 Sep 2026 04:08:48 PM (IST)Updated Date: Thu, 24 Sep 2026 04:08:48 PM (IST)
मैहर में छह कुमकी दल ने घेरा फिर भी चकमा दे गया हाथी ई-5, बारिश बनी रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा
गोरसरी घाटी गुजरता हाथी ई5, लगातार अपनी दिशा बदलता रहा और रेस्क्यू टीम की पकड़ से बाहर निकलता रहा। सौजन्‍य विभाग

HighLights

  1. गोरसरी, रामनगर और अमरपाटन मार्ग पर बैरिकेडिंग की गई
  2. अभियान के बावजूद हाथी को सुरक्षित पकड़ने में सफलता नहीं
  3. सुरक्षा के लिए 150 वनकर्मी और पुलिस बल को तैनात किए गए

नईदुनिया प्रतिनिधि, मैहर। जिले के मैहरवनमंडल अंतर्गत आने वाले अमरपाटन वन परिक्षेत्र की गोरसरी पहाड़ी में पिछले 17 दिन से डेरा डाले जंगली हाथी ई-5 (सी-4) को पकड़ने के लिए बुधवार रात वन विभाग ने बड़ा रेस्क्यू अभियान चलाया।

वह लगातार रेस्क्यू दल को चकमा देता रहा

बांधवगढ़ से लाए गए छह कुमकी हाथियों की मदद से जंगली हाथी की घेराबंदी की गई, लेकिन वह लगातार रेस्क्यू दल को चकमा देता रहा।

हाथी को सुरक्षित पकड़ने में सफलता नहीं मिली

देर रात तक चले अभियान के बावजूद हाथी को सुरक्षित पकड़ने में सफलता नहीं मिली। इधर गुरुवार को दोपहर से शुरु हुई बारिश कि वजह से रेस्क्यू कार्य पुन: प्रभावित होता रहा और दूसरे दिन भी वन विभाग को रेस्क्यू बंद करना पड़ा।

उपवनमंडलाधिकारी दीपांकर सिद्धार्थ बताते हैं कि ई-5 का रेस्क्यू कब तक किया जाएगा या कितना समय लगेगा। इस पर कुछ कह पाना मुश्किल है। उसे ट्रैकुंलाइज करने के बाद ही कुछ कह पाना भी संभव होगा।

चार वन क्षेत्रों की टीमें जुटीं


अभियान में मैहर वन मंडल के अलावा अमरपाटन, मुकुंदपुर और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की टीमें शामिल रहीं। करीब 150 वनकर्मी और पुलिस बल को तैनात किया गया था। अभियान की निगरानी डीएफओ विद्या भूषण मिश्रा, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय, डिप्टी डायरेक्टर युहान कटारा, मैहर एसडीओ सिद्धार्थ दीपांकर और रेंजर प्रफुल्ल त्रिपाठी ने की।

कुमकी हाथियों ने घेरा, लेकिन निकल गया

वन विभाग की टीम ने गोरसरी पहाड़ी के आसपास घेराबंदी कर छह कुमकी हाथियों की मदद से ई-5 को चारों ओर से घेरने का प्रयास किया। जंगली हाथी लगातार अपनी दिशा बदलता रहा और रेस्क्यू टीम की पकड़ से बाहर निकलता रहा। इसके चलते देर रात तक अभियान चलता रहा, लेकिन हाथी को काबू नहीं किया जा सका।

तीन मार्गों पर बैरिकेडिंग

रेस्क्यू के दौरान गोरसरी, रामनगर और अमरपाटन मार्ग पर बैरिकेडिंग की गई। हाथी के अचानक मुख्य मार्ग पर आने की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों और वाहन चालकों की आवाजाही पर भी निगरानी रखी गई। वन विभाग ने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की थी।

बांधवगढ़ से निकला था हाथी

उल्वलेखनीय है कि वन विभाग के अनुसार ई-5 (सी-4) 7-8 सितंबर की रात बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से निकला था। उसने बाणसागर बांध के पास करीब पांच किलोमीटर लंबे जलमार्ग को तैरकर पार किया और अमरपाटन वन क्षेत्र में पहुंच गया।

वन विभाग कर रहा है लगातार उसकी निगरानी

मैहर क्षेत्र में पहुंचने के बाद मौहारी गांव के ग्रामीण कंछेदी यादव की हाथी के हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद से वन विभाग लगातार उसकी निगरानी कर रहा है और उसे सुरक्षित पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। बुधवार रात का अभियान भी इसी क्रम में चलाया गया, लेकिन हाथी फिर पकड़ से बाहर रहा।

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