
पन्ना। जिले का हराभरा जंगल कुछ ही समय बाद खेतों में तब्दील हो जाएगा। यदि समय रहते वन विभाग द्वारा वन भूमि से अवैध कब्जे को नहीं हटाया गया तो इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उत्तर वनमंडल क्षेत्र के विश्रामगंज रेंज के अंतर्गत जनकपुर ग्राम से लेकर रानीपुर ग्राम तक बड़े पैमाने पर भू-माफियाओं द्वारा अपने आदिवासी समाज के मजदूरों के नाम पर जमीनों में अवैध रूप से कब्जा करना शुरू कर दिया है। जंगल की भूमि के हरे भरे पेड़ काटकर बारी लगा दी गई है। जोकि आगे चलकर इस भूमि में भूमाफिया निजी खेती करके जंगल को जहां उजाड़ने का काम करेंगे। वहीं आदिवासी मजदूरों के नाम पर भारी- भरकम राशि कमाएंगे। जनकपुर के स्थानीय लोगों ने जानकारी देते हुए बताया कि भूमाफियाओं द्वारा आदिवासी समाज के कुछ लोगों को आगे कर उक्त जमीन पर अवैध कब्जा करना शुरू कर दिया है। जोकि आगे चलकर वन विभाग के लिए घातक हो सकता है। इसके साथ ही वन प्रेमी लोगों के लिए हानिकारक होगा। बताया गया है कि वन भूमि पर लगातार अवैध कब्जा हो रहा है मगर उक्त जमीन से कब्जा हटाने को लेकर वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिसकी वजह से भू माफियाओं का मनोबल दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि विश्रमगंज परीक्षेत्र में हो रहे अवैध कब्जे को जंगल की भूमि से शीघ्र हटाया जाए। ताकि जंगल की भूमि को बर्बाद ना किया जा सके।
जिले में आदिवासियों की जमीन पर दबंगों का कब्जा
जिले में कल्दा पठार से लेकर जिले के चारों तरफ आदिवासी समाज के नाम पर भले ही पट्टे दर्ज हों मगर उनकी जमीनों पर बड़े पैमाने पर दबंग लोगों द्वारा कब्जा कर रखा गया है। जिसको लेकर जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कभी भी ध्यान नहीं दिया गया। आदिवासी समाज के लोगों को शराब व अन्य नशों की लत में डूबाकर उनसे स्टॉम्प पेपर पर अंगूठा लगाकर उनकी जमीनों को गिरवी रख ली गई हैं और गरीब मजदूरों की जमीनों पर वर्षों से दबंग लोगों द्वारा खेती की जा रही है। जिसकी पड़ताल कभी भी जिले के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नहीं की गई। जिसकी वजह से आज गरीब मजदूरों की जमीनों पर दबंग लोग खेती तथा पत्थर खदानों का संचालन बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों से व मुख्यमंत्री से समाजसेवियों द्वारा आग्रह किया गया है कि जिले में आदिवासी समाज की जमीनों की समय-समय पर जांच पड़ताल की जाए कि जो जमीन के पट्टे गरीब आदिवासियों को भरण-पोषण के लिए दिए गए हैं उन पर उनके द्वारा ही खेती की जा रही है या फिर उनकी जमीनों पर दबंग लोगों द्वारा खेती व खदानों का संचालन कर भारी भरकम कमाई की जा रही है।