
सतना/मैहर। जिले में खेतों में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने की लापरवाही अब भयावह रूप ले चुकी है। अलग-अलग क्षेत्रों में आगजनी की घटनाओं ने जहां एक किसान की जान ले ली, वहीं कई गांवों को चपेट में लेकर भारी नुकसान पहुंचाया है। लगातार हो रही घटनाओं से प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मझगवां के जैतवारा थाना क्षेत्र में एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जहां खेत में लगी भीषण आग बुझाने के प्रयास में किसान मुन्नीलाल त्रिपाठी (55 वर्ष) की झुलसकर मौके पर ही मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि आग तेजी से फैलते हुए खेत में बने मकान तक पहुंच गई थी। आग पर काबू पाने की कोशिश में वे गंभीर रूप से झुलस गए।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। वहीं, कोठी अस्पताल में पोस्टमार्टम को लेकर डॉक्टरों की आनाकानी की खबर से परिजनों में आक्रोश भी देखा गया।
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही बरौंधा क्षेत्र में भी आग से एक वृद्ध की मौत हो चुकी है। लगातार बढ़ रही घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि नरवाई जलाने पर रोक के बावजूद लापरवाही जारी है।
अमरपाटन क्षेत्र के ग्राम ओबरा में नरवाई की आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। तेज हवाओं के कारण आग करीब 2 किलोमीटर तक फैल गई और गांव तक पहुंच गई। इस दौरान गोरेलाल पटेल का कच्चा मकान आग की चपेट में आ गया। देखते ही देखते घर में रखा अनाज, भूसा और पूरा घरेलू सामान जलकर राख हो गया। घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।
मैहर जिले में एक ही दिन में तीन अलग-अलग आगजनी की घटनाएं सामने आईं। पहाड़ी मंटोलवा क्षेत्र में खेतों की नरवाई से निकली आग मड़ई, धनवाही और उमरी फीफरी गांवों तक फैल गई। ग्रामीणों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।कब्रिस्तान के पास झाड़ियों में लगी आग को दमकल और स्थानीय लोगों की मदद से बुझाया गया। ओबरा गांव की घटना सबसे भयावह रही, जहां आग ने रिहायशी क्षेत्र को भी नहीं छोड़ा।