आष्टा। लॉकडाउन के बाद रसोई गैस सिलेंडर भरवाने में कमी आई है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना उज्ज्वला गैस कनेक्शन है। महिलाओं को लकड़ी या कंडे जलाकर खाना बनाने से दूर करने के लिए यह योजना लाई गई, लेकिन शत-प्रतिशत उपभोक्ता सिलेंडर ही नहीं भरवा पा रहे हैं। बहुत सी महिलाएं आज भी चूल्हे में लकड़ी जलाकर खाना पकाने को मजबूर हैं। लॉकडाउन के बाद सिलेंडर भरवाने में कमी आई है, जिसके लिए योजना के लाभार्थी आर्थिक परेशानी बता रहे हैं।

उज्ज्वला गैस योजना के तहत महिलाओं को गैस कनेक्शन वितरित किए गए थे। योजना की शुरुआत में सिलिंडर भरवाने की स्थिति ठीक थी, लेकिन अब वह बदल गई थी। दरसल गैस सिलिंडर 766 रुपये में मिल रहा है। सिलिंडर पर सब्सिडी नहीं मिल रही है। ऊपर से बुकिंग के बाद गांव तक ले जाने में सिलेंडर साढ़े आठ सौ रुपया तक पड़ जाते हैं। ऐसे में उज्ज्वला योजना में शामिल गरीबों का कहना है कि रोज की जरूरत का सामान लाएं कि बच्चों को पढ़ाएं, दवा पर खर्च करें या सिलिंडर भरवाएं एक बार सिलिंडर उठाने में हजार रुपये के करीब खर्च आते हैं। वहीं क्षेत्र के अधिकांश गांव में तो महिला उपभोक्ताओं ने गैस चूल्हा को बांधकर घर के कोने में रख दिए हैं और आस पास से बीनकर लाई गई लकड़ी और कंडो से चूल्हा जला रहे हैं।

लकड़ी और कंडे पर खाना बनाने में सस्ते ईंधन होने के कारण महिलाएं इस्तेमाल करती हैं। जिससे मानव स्वास्थ्य खासकर घर की महिलाओं और बच्चों के सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है। इसलिए चूल्हे के धुएं से बचना बेहद जरूरी है।

डॉ. प्रवीर गुप्ता, बीएमओ

वर्ष 2016 से 2018 के बीच योजना के तहत गरीब परिवार की महिलाओं को गैस कनेक्शन दिए गए थे, लेकिन सिलेंडर के दाम अधिक होने के कारण सिर्फ 10 फीसद उपभोक्ता सिलिंडर भरवाने आते हैं, उसमें भी अधिकांश लोग तो चार से छह महीने में एक बार गैस सिलेंडर के लिए आते हैं।

विपिन बनवट, गैस एजेंसी संचालक

कुछ उज्जवला योजना के उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस कनेक्शन तो है, लेकिन आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि हर महीने इतना मंहगा गैस सिलेंडर भरवा सकें। हमारी इतनी आमदनी हमारी नहीं है। इसलिए चूल्हे पर ही खाना बना रहे हैं।

सिर्फ नाम की सब्सिडी रह गई है

जब मुझे कनेक्शन मिला तो सोचा था, कि अब चूल्हे पर खाना नहीं पकाना होगा। लेकिन महंगा सिलिंडर और नाम मात्र की सब्सिडी से फिर चूल्हा फूंकना पड़ रहा है।

लताबाई, निवासी वार्ड 15

यह मामला अभी मेरी जानकारी में नहीं है। सप्लाई ऑफिसर को जांच के निर्देश देकर पता करता हूं, अगर उपभोक्ता सिलेंडर भरवाने नहीं आ रहे हैं तो उनको इसके लिए प्रेरित किया जाएगा।

विजय मंडलोई, एसडीएम

Posted By: Nai Dunia News Network

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