सिवनी। नईदुनिया प्रतिनिधि
लक्ष्मी, धन-सम्पदा कहां रहती है, जहां शुद्ध मति रहती है। जहां अशुद्ध मती रहती है वहां लक्ष्मी बड़ी उपद्रव करती हैं। आपके घर लक्ष्मी है तो घर-परिवार में संस्कार भी अच्छे हो, जीवन में सदाचार, प्रभू निष्ठा भी हो तब ही लक्ष्मी रुकती है नहीं तो धन-संपदा धीरे-धीरे कब नष्ट हो जाती है, विपदा कब आ जाती है पता ही नहीं चलता है। इस आशय की बात कथावाचक मंगलमूर्ति शास्त्री ने केवलारी के समीपस्थ गांव मलारा में जारी श्रीमद् भागवत कथा में श्रद्धालुजनों से कही।
शास्त्री ने आगे कहा कि जब कभी भी विषम परिस्थिति आए तो चिंतित न हो, घबराए नहीं भगवान की व्यवस्था पर विश्वास रखना चाहिए। जीवन में जीवकोपर्जन के लिए काम धाम करते रहे लेकिन मूल चीज कभी न भूले। मूल चीज है प्रभु का ध्यान, भक्ति। जीवन को सफेद व स्वच्छ रूप से जीना चाहिए। जब सिर के बाल सफेद हो जाए तो समझो अब भक्ति का मार्ग ही अपनाना सही है। कमाई हुई दौलत, सम्पदा सब यहीं छूट जाएगा। पुत्र, संतान कोई साथ न देगा। बुढ़ापा आ रहा हो तो समझे पीछे-पीछे काल आ रहा है। इसलिए भगवान के प्रति प्रेम, भक्ति में ही अपना जीवन लगाना चाहिए।
कोई क्या कहेगा यह न सोचे - कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। लोगों के सर्टिकेट लेने के चक्कर में न पड़ा करों, तुम्हारी आत्मा जो कहे वह किया करो। मन तो बेईमान है, मन की न सुने, अपनी अंतरआत्मा की सुनो। आत्मा जो कहे वह किया करो। नाती-पौते, पुत्र-पौत्र वधु, पत्नी सभी अपने-अपने स्वार्थ में लगे हैं। परिवार को कितना भी दे दो,
किनता भी खुश करो वे संतुष्ट नहीं होते, खुश नहीं होते। प्रभू की भक्ति आपको सच्ची शांति देगी, खुशियां प्रदान करेगी। कथा का समापन 27 दिसम्बर को हवन, भंडारा, प्रसाद वितरण के साथ होगा।