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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 22, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Subhash Chandra Bose Jayanti: नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने सिवनी जेल में गुजारी थी 147 रातें

Subhash Chandra Bose Jayanti:भारत सरकार के जन्मदिन को पराक्रम दिवस के तौर पर मना रही है।

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Sun, 22 Jan 2023 10:26:43 PM (IST)Updated Date: Mon, 23 Jan 2023 01:42:51 AM (IST)
Subhash Chandra Bose Jayanti: नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने सिवनी जेल में गुजारी थी 147 रातें

Subhash Chandra Bose Jayanti: संजय अग्रवाल, सिवनी। 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा' और 'जय हिन्द' जैसे करिश्माई नारों से देश की आजादी की लड़ाई में नई ऊर्जा भरने वाले नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 127 वीं जयंती 23 जनवरी आज देश भर में मनाई जाएगी। नेताजी सुभाषचंद्र बोस भारत के उन महान स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल है, जिनसे आज के दौर का युवा वर्ग प्रेरणा लेता है।देश के स्वाधीनता आंदोलन के नायकों में से एक नेताजी की जीवनी, उनके विचार और उनका कठोर त्याग आज के युवाओं के लिए बेहद प्रेरणादायक है।

पराक्रम दिवस मना रही सरकार

भारत सरकार के जन्मदिन को पराक्रम दिवस के तौर पर मना रही है। आजाद हिंद फौज का गठन करने वाले सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्मृतियां सिवनी से जुड़ी हैं। नेताजी ने बंदी के तौर पर 147 रातें सिवनी के पुराने जेल भवन (बाल सुधारालय गृह) में गुजारी थी, इनकी स्मृतियां आज भी उसी स्वरूप में सुरक्षित हैं।नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की रसोई और उनके द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली वस्तुएं आज भी यहां सुरक्षित हैं।


खुद भोजन बनाते थे नेताजी

ब्रिटिश हुकुमत ने तीन जनवरी 1932 से लेकर 30 मई 1932 तक आजादी के दीवानों के साथ नेताजी सुभाषचंद्र बोस को सिवनी के पुराने भवन में बंदी बनाकर रखा था।इन दिनों में नेताजी अपना भोजन खुद बनाते थे।पुराने जेल भवन को बाद में बाल सुधार गृह में परिवर्तित कर दिया गया।यहां पर नेताजी की रसोई व उनके उपयोग में लाई जाने वाली वस्तुएं आज भी सुरक्षित रखीं हैं।बाल सुधार गृह में समाज से भटके बालकों को रखकर समाज की मुख्य धारा में जोड़ने सुधारा जाता है।वहीं दूसरे हिस्से में शासकीय कन्या महाविद्यालय संचालित हो रहा है।

नेताजी के साथ रहे कई महान क्रांतिकारी

नेताजी सुभाषचंद्र बोस को ब्रिटिश हुकूमत के आदेश पर तीन जनवरी 1932 को सिवनी कारागार लाया था।नेताजी के साथ कई महान क्रांतिकारियों को जेल में रखा गया था।इनमें मुख्य रुप से नेताजी के भाई शरदचंद्र बोस भी शामिल थे। जेल में आचार्य विनोबा भावे, माधव सदाशिव गोलवलकर, शिवदास डागा, सेठ गोविंद दास व अन्य को भी बंदी रखा गया था। जेल के इस कक्ष को स्मृति कक्ष नाम देकर आज भी उसी स्वरूप में रखा गया है।कारागार में रहने के दौरान नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वारा अपना भोजन स्वयं पकाया जाता था। बंदी कक्ष के ठीक सामने रसोई कक्ष है, जिसमें चूल्हे पर नेताजी प्रतिदिन अपना भोजन बनाया करते थे। इस स्थान को बाल सुधारालय प्रबंधन द्वारा स्मृति स्वरुप संजोकर अपने मूल स्वरुप में रखा गया है।

इतिहास को संजोने तैयार की थी पेंटिंग

वन्यजीवन और समसामयिक विषयों पर अपनी पेंटिंग के जरिए जागरूकता फैलाने वाले मशहूर चित्रकार व वनरक्षक रोहित शुक्ला ने सिवनी जेल में कैद रहे नेताजी सुभाषचंद्र बोस की स्मृति को सिवनी के इतिहास में संजोने पिछले साल एक खूबसूरत पेंटिंग भी तैयार की थी।रोहित शुक्ला ने नईदुनिया को बताया कि जिला प्रशासन के आग्रह पर उन्होंने सिवनी के पुराने जेल भवन में कैद रहे नेताजी सुभाषचंद्र बोस की पेटिंग तैयार की थी।

पुराना जेल परिसर जो वर्तमान में किशोर न्याय अधिनियम के तहत संचालित शासकीय बाल सुधारालय के नाम से जाना जाता है।महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस इसी परिसर में सन 1932 में रहे थे, यह गौरव की बात है।आज भी इस परिसर में राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत नेताजी की सकारात्मक ऊर्जा को महसूस किया जा सकता है। अभिजीत पचौरी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग सह, अधीक्षक सुधरालय सिवनी।