
सिवनी (नईदुनिया प्रतिनिधि)। आदिवासी विकास विभाग में अनुसूचित जाति-जनजाति बस्ती विकास व विद्युतीकरण योजना में गड़बड़ी के आरोपों की जांच एक साल बाद भी पूरी नहीं हुई हो पाई है। शहर के बरघाट रोड टैगोर वार्ड निवासी भोजराज मदने ने 20 जून 2020 को आदिवासी विकास विभाग भोपाल आयुक्त व आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो जबलपुर व भोपाल के अधिकारियों से योजनाओं में गड़बड़ी की शिकायत की थी। इसके बाद जब जबलपुर आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने शिकायतकर्ता के बयान दर्ज कर प्ररकण में छानबीन शुरू की थी। करीब एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी ईओडब्ल्यू जबलपुर संभागीय कार्यालय की जांच पूरी नहीं हो पाई है।
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों की माने तो जांच के लिए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने में देरी की जा रही है। संबंधित विभाग व कलेक्टर को लगातार पत्र भेजकर योजना से जुड़े दस्तावेज मांगे जा रहे है। कई दस्तावेज प्राप्त हो गए हैं जबकि कुछ दस्तावेजों का इंतजार किया जा रहा है। जांच के दौरान जानकारियों का सत्यापन करने भी अन्य दस्तावेजों को बुलाना पड़ रहा है। इसके चलते जांच में विलंब हो रहा है। टैगोर वार्ड निवासी भोजराज मदने ने पिछले साल अधिकारियों को भेजी शिकायत में सिवनी जिले में पदस्थ आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त सतेंद्र मरकाम पर नियमों को तोड़ मरोड़कर मनमाने तरीके से निर्माण कार्य कराने व आर्थिक अनियमितता के आरोप लगाए थे।
नक्शों में फेरबदल के आरोपः शिकायत में साल 2017-18, 2018-19 व 2019- 20 वित्तीय वर्ष में योजना के तहत मिली करोड़ों र्स्पये की राशि से 30 से 50 फीसद एसटी
एससी आबादी वाले क्षेत्र में निर्माण कार्य करने के आरोप लगाए गए थे। जबकि नियमों के मुताबिक 80 फीसद से अधिक अनुसूचित जाति, जनजाति जनसंख्या वाले गांव में निर्माण कार्य कराए जाने थे। इतना नहीं शिकायत में ग्राम पंचायत द्वारा कराए गए कामों में स्वीकृति के लिए नक्शों में फेरबदल करने के भी आरोप लगाए गए थे।
सामग्री खरीदी में गड़बड़ी के आरोपः शिकायत में कहा गया है कि सहायक आयुक्त के पद पर पदस्थ सतेंद्र मरकाम का मूल पद जिला संयोजक (डीओ) का है। इसके बावजूद वे तीन साल से अधिक समय से सिवनी सहायक आयुक्त के पद पर बने हुए हैं। जिले के छात्रावास, आश्रम, हायर सेकेंडरी व हाईस्कूलों में सामग्री खरीदी में भी सहायक आयुक्त व अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा दखल दिया जाता है। पुरानी सामग्रियों को कबाड़ बताकर नई सामग्री की खरीदी करने के आरोप लगाए गए थे। विभिन्ना् स्कूलों व छात्रावासों में पदस्थ कर्मचारियों को सहायक आयुक्त कार्यालय में अटैच किया गया है। 15 सालों से ये कर्मचारी कार्यालय में कार्यरत हैं।
विद्युतीकरण की राशि से बना दी पुलिया व सीसी रोडः अनुसूचित जाति जनजाति बस्ती विकास, मंजरेटोलों का विद्युतीकरण व पंपों का उर्जीकरण योजना के तहत एसटीएससी के किसानों के खेतों तक बिजली पहुंचाई जानी थी। लेकिन अधिकारियों ने विद्युतीकरण की राशि निर्माण कार्यों में स्वीकृत कर पुलिया व सीसी सड़क बनवा दी। साल 2018-19 में 272.70 लाख के 16 निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए थे। सितंबर 2018 में योजना से सात काम 108.57 लाख र्स्पये से स्वीकृत किए गए थे। साल 2019-20 में 7 कामों पर 103.81 लाख र्स्पये खर्च किए गए हैं। योजना पर मिली राशि में से 30 फीसद राशि किसानों के खेतों तक थ्री फेस लाइन बिछाने व विद्युतीकरण पर खर्च की जानी थी, जबकि 70 बस्ती विकास में सीसी रोड, नाली, पुलिया व अन्य निर्माण कार्यों में खर्च होना था। सांसद, विधायक की अनुशंसा व कलेक्टर की स्वीकृति के बाद भी 30 फीसद राशि से विद्युतीकरण कार्य नहीं कराए गए हैं।
आदिवासी विकास विभाग सिवनी के सहायक आयुक्त के खिलाफ मिली शिकायत में जांच चल रही है। संबंधित विभाग व कलेक्टर से जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। जैसे -जैसे दस्तावेज प्राप्त हो रहे जांच को आगे बढ़ाया जा रहा हैं। प्रकरण में सभी तथ्यों की विस्तृत जांच की जा रही हैं।
मंजीतसिंह, जांच अधिकारी
ईओडब्ल्यू जबलपुर।