
नईदुनिया प्रतिनिधि, शहडोल। जिले में संचालित शासकीय आवासीय छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त आनंद राय सिन्हा को कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर सात दिन के भीतर लिखित रूप में स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
सूचना पत्र में कहा गया है कि विगत कुछ महीनों से निरंतर यह संज्ञान में आ रहा है कि विभाग के अंतर्गत संचालित शासकीय आवासीय छात्रावासों से छात्र-छात्राएं मूलभूत सुविधाओं जैसे स्वच्छ पेयजल, गुणवत्तापूर्ण भोजन, बिजली, साफ-सफाई तथा सुरक्षा के अभाव से संबंधित गंभीर शिकायतें लेकर निरंतर जिला कार्यालय आ रहे हैं।
कलेक्टर ने पत्र में स्पष्ट किया है कि छात्रावासों की इस दयनीय स्थिति और छात्रों के लगातार जिला मुख्यालय आने से यह स्पष्ट होता है कि सहायक आयुक्त द्वारा छात्रावासों का विधिवत एवं नियमित पर्यवेक्षण नहीं किया जा रहा है।
शासन की महत्वाकांक्षी आवासीय योजनाओं के प्रति यह उदासीनता और लचर प्रशासनिक नियंत्रण न केवल अत्यंत आपत्तिजनक है, बल्कि इससे जिला प्रशासन की छवि भी धूमिल हो रही है।
पत्र में यह भी लिखा गया है कि उक्त कृत्य शासकीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही, अकर्मण्यता और स्वेच्छाचारिता को प्रदर्शित करता है, जो मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम-3 के सर्वथा विपरीत है तथा मध्य प्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम, 1966 के तहत दंडनीय अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि नियत समयावधि में समाधानकारक उत्तर प्राप्त न होने की दशा में यह माना जाएगा कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है और उनके विरुद्ध मध्य प्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम, 1966 के सुसंगत प्रावधानों के तहत एकपक्षीय अनुशासनात्मक व दंडात्मक कार्रवाई के लिए वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेज दिया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी उनकी होगी।
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