नलखेड़ा। विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर पर दर्शनार्थियों को हवन करवाना महंगा पड़ेगा। क्योंकि मंदिर समिति द्वारा हवन शुल्क की राशि में शुक्रवार से वृद्धि कर दी गई हैं। अब दर्शनार्थियों को हवन कुंड के शुल्क की रसीद 350 रुपए की जगह 500 रुपए की बनवाना पड़ेगी। जानकारी के अनुसार विश्व प्रसिद्ध मा बगलामुखी मंदिर में मंदिर समिति द्वारा शुक्रवार से हवन कुंड की शुल्क की राशि मैं अचानक वृद्धि कर दी गई है अब
हवन करवाने आने वाले श्रद्धालुओं को हवन कुंड का शुल्क 500 रुपए देना होगा। शुक्रवार को कई दर्शनार्थियों द्वारा हवन कुंड की शुल्क राशि 500 रुपए देकर हवन करवाया गया।
उल्लेखनीय है कि मां बगलामुखी मंदिर समिति द्वारा एक अप्रैल 2022 से हवन शुल्क की राशि में बढ़ोतरी करते हुए हवन शुल्क की राशि 500 रुपए करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन मां बगलामुखी मंदिर में पूजा पाठ कराने वाले पंडितों एवं नगर के नागरिकों द्वारा हवन कुंड की
राशि में की गई वृद्धि को लेकर विरोध दर्ज करवाते हुए मंदिर समिति के पदेन अध्यक्ष एवं एसडीएम सोहन कनास को ज्ञापन सौंपकर हवन शुल्क की राशि में वृद्धि नहीं करने तथा पूर्व में ली जा रही है शुल्क की राशि 350 रुपए ही रखने की मांग की गई थी इस पर मंदिर समिति द्वारा हवन कुंड शुल्क में वृद्धि नहीं करते हुए हवन कुंड की शुल्क 350 ही यथावत रखी गई थी। लेकिन शुक्रवार से एक बार फिर मंदिर समिति द्वारा हवन कुंड शुल्क में वृद्धि करते हुए हवन शुल्क की राशि 500 रुपए कर दी गई है। मां बगलामुखी मंदिर समिति द्वारा हवन शुल्क की राशि में की गई वृद्धि से दर्शनार्थियों की जेब पर असर पड़ेगा वही कई दर्शनार्थी हवन करवाने से वंचित रह जाएंगे। क्योंकि मां बगलामुखी मंदिर में ऐसे कई श्रद्धालु आते हैं जो जैसे तैसे राशि एकत्रित कर अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए मंदिर में हवन पूजन करवाते हैं लेकिन मंदिर समिति द्वारा की गई हवन शुल्क की वृद्धि से कई भक्तों को हवन
पूजन से वंचित होना पड़ेगा।
भक्तों के लिए नहीं है कोई व्यवस्था
विश्व प्रसिद्ध मा बगलामुखी मंदिर में देशभर से श्रद्धालु आकर अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए मंदिर में हवन पूजन करवाते हैं। हवन करने के लिए दर्शनार्थी हवन शुल्क की राशि भी चुकाते हैं। लेकिन उसके बाद भी दर्शनार्थियों को मंदिर समिति से कोई सुविधा नहीं मिल पाती है। यज्ञशाला में साफ-सफाई का भी अभाव रहता है जिसके चलते हवन कराने वाले पंडितों द्वारा ही यज्ञशाला की साफ सफाई की जाती है।