-कंस वधोत्सव आज : आचार संहिता के चलते फीका रहेगा आयोजन
शाजापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि
शहर में ऐतिहासिक कंस वधोत्सव की परंपरा का आज (रविवार को) निर्वहन होगा। आयोजन को लेकर शहरवासियों का उत्साह चरम पर है, लेकि न इस बार आचार संहिता के चलते आयोजन का मजा कु छ फीका रहेगा। दरअसल, आजाद चौक में रात 10 बजे तक देव व दानवों के बीच जोरदार वाकयुद्ध होगा। माइक की परमिशन 10 बजे तक ही होने से सोमवारिया बाजार में कंस वध होने तक वाकयुद्ध बिना माइक के ही होगा। इधर कंस की सेना में भी इस बार सदस्यों की संख्या कम रहेगी।
कंस वधोत्सव के लिए इसके लिए आयोजन समिति पिछले एक पखवाड़े से तैयारी में जुुटी है। करीब दस फु ट ऊंचा कंस का पुतला सोमवारिया बाजार स्थित कंस चौराहे पर विराजित कि या जा चुका है। इस बार कंस को बॉडी बिल्डर के रूप में दिखाया गया है। दूर-दराज से लोग कंस के पुतले को देखने आ रहे हैं। रविवार को कंस वध परंपरागत रूप से होगा। देव व दानव बनने वाले कलाकार अपनी पारंपरिक वेषभूषा आदि को संदूक से निकाल चुके हैं।
निकलेगा चल समारोह
कंस वध के पहले रविवार को रात 8 बजे बालवीर हनुमान मंदिर परिसर से चल समारोह शुरू होगा। यह सोमवारिया बाजार, मगरिया, काछीवाड़ा, टेंशन चौराहा, बस स्टैंड, नई सड़क होते हुए आजाद चौक पहुंचेगा। इस बार देव व दानव सभी रथ में सवार होकर निकलेंगे, जबकि पहले ट्रैक्टर-ट्रॉली में दानवों की टोली जाती थी। रात 9 बजे आजाद चौक में देव और दानव बने कलाकारों के बीच संवाद होगा। यह संवाद रात 10 बजे तक चलने के बाद सभी सोमवारिया बाजार में पहुंचेंगे। जहां कंस वध के पहले तक बिना माइक के डायलॉग बोले जाएंगे। ऐसे में वहां जमा भीड़ को हर जगह यह सुना नहीं पाएंगे। इसके बाद रात 12 बजे कंस के पुतले को गवली समाजजनों द्वारा लाठियों से पीट-पीटकर घसीटते हुए ले जाया जाएगा।
इस तरह शुरू हुई परंपरा
शहर में वर्षो से निभाई जा रही कंस वध की परंपरा अन्याय व अत्याचार पर जीत के प्रतीक का पर्व के रूप में मनाई जाती है। आयोजन समिति के सुरेंद्र मेहता व तुलसीराम भावसार ने बताया कि गोवर्धननाथ मंदिर के मुखिया मोतीराम मेहता ने करीब 264 वर्ष पूर्व मथुरा में कंस वधोत्सव देखा और फिर शाजापुर में वैष्णवजनों को अनूठे आयोजन के बारे में बताया। इसके बाद से ही परंपरा की शुरुआत हो गई। करीब 100 वर्ष तक मंदिर में ही आयोजन होता रहा किंतु जगह की कमी के चलते इसे कंस चौराहे पर करने लगे। आयोजन में शाजापुर समेत बाहरी जिलों से भी लोग शामिल होते हैं।
लकड़ी की रहेंगी तलवारें
देव व दानवों में होने वाले वाकयुद्ध में बोले जाने वाले डायलॉग तत्कालीन मुद्दों पर आधारित रहते हैं, लेकि न इस बार आचार संहिता के चलते देव हो या दानव डायलॉग भी सोच समझकर तैयार कि ए जा रहे हैं। आचार संहिता के चलते हथियार प्रतिबंधित होने से इस बार होने दानवों के हाथ में रहने वाली तलवारें लोहे की ना होकर लकड़ी की रहेंगी।
17 एसजेआर 1-चौराहे पर कंस का पुतला सभी के आकर्षण का कें द्र बना हुआ है।