
शाजापुर। जिले में लगातार चली बारिश ने किसानों के समक्ष समस्या खड़ी कर दी है। बारिश के चलते सोयाबीन से फूल खिरने की समस्या सामने आई है। इल्लियों का प्रकोप भी जारी है। भारतीय किसान संघ ने सर्वे की मांग की है।
जिले में खरीफ की 2 लाख 65 हजार हेक्टेयर में बुआई की गई है। इसमें सोयाबीन का रकबा 2 लाख 50 हजार हेक्टेयर है। बुआई के बाद बारिश की खेंच और फिर लगातार बारिश के चलते फसलों की सेहत खराब हो रही है। फसलें पीली पड़ रही हैं। वहीं फसलों पर सेमीलूपर, गर्डल बीटल एवं तंबाकू की इल्ली का प्रकोप छाया हुआ है। लगातार बारिश के कारण इल्लियों की रोकथाम की दवाओं का छिड़काव नहीं हो पाया। इस कारण इल्लियों ने काफी नुकसान पहुंचाया है।
कई गांवो में फसलों की हालत खराब
क्षेत्र में अतिवर्षा के कारण फसल नष्ट होने की कगार पर है। कई खेत तो पानी भरने से तालाब बन गए हैं। किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरे साफ दिखाई दे रही हैं। मकोडी सरपंच रमेशचंद्र गौड, राधेश्याम पाटीदार, रमेशचंद्र पाटीदार, कैलाशचंद्र पाटीदार, दयाराम कराड़ा सहित ग्रामीणों का कहना है कि बारिश राहत की बजाय आफत लेकर आई है। सोयाबीन फसल के फूल बड़ी मात्रा में खिर गए हैं। इससे उत्पादन पर असर पड़ेगा। इसी प्रकार जरखी, सकराई, सकेड़ी, दास्ताखेड़ी, सिमरोल शू, टिटोड़ी खेड़ा, मखावद, धतुरिया, गुलाना, कुड़ाना आदि गांवों में सोयाबीन फसल को नुकसान हुआ है। कई खेतों में सोयाबीन बांझ रह गई है, कई जगह फूल आए ही नहीं वहीं कुछ जगह फूल आए तो वह भी खिर गए। इन गांवों में भी यही समस्या है। भारतीय किसान संघ के जिला मीडिया प्रभारी राजबहादुरसिंह गुर्जर ने बताया कि फूल झडने की समस्या अनेक किसानों की फसलों में हुई है। ऐसे में संघ की मांग है कि फसलों का सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाए।
ये करें किसान
कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को सलाह दी है कि किसानों को चाहिए कि वह खेतों में नजर रखें। किसान कैप्टान प्लस हेक्जाकोनोजोल स्टेप्टो साईक्लिन का छिडकाव करें वहीं फसलों में सूक्ष्म तत्वों का भी छिडकाव करें। जिन खेतों में तंबाकू की इल्ली हो वहां रेनेक्सी पीयर का छिडकाव कर सकते हैं। वहीं किसान समस्या होने पर कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।
फसलों की सेहत सुधारने में जुटे किसान
बारिश का दौर थमने के बाद किसाना फसलों की सेहत सुधारने में जुट गए हैं। किसान अपने खेतों में सोयाबीन सहित अन्य फसलों की देख-रेख में जुट गए हैं। कीट व्याधि एवं बीमारियों की रोकथाम के लिए दवाओं का छिड़काव करने लगे हैं। इस वर्ष खरीफ फसलों एवं किसानों की मानों कड़ी परीक्षा ही ली है। पहले बेहतर बारिश होने के बाद किसानों ने समय पर बुआई कर दी लेकिन इसके बाद बारिश की खेंच का दौर चला, फिर बारिश का दौर ऐसा चला कि रुकने का नाम हीं नहीं लिया। अधिक बारिश के कारण खेतों में पानी जमा हो गया। फसलों की पीली पड़ने और कीट व्याधियों की चपेट में आने लगी।
इन दिनों तंबाकू की इल्ली का प्रकोप फसलों पर दिखाई दे रहा है लेकिन बारिश के कारण किसानों को दवा छिड़काव के लिए मौका नहीं मिल रहा था। मौसम थोड़ा खुला तो किसान ताबड़तोड़ दवाओं के छिड़काव करने में जुट गए हैं। कृषि विशेषज्ञों से किसान समस्या का विवरण बताकर दवाओं के नाम पूछने के लिए संपर्क कर रहे हैं। इधर, कृषि संबंधित दवाओं के दुकानदारों का धंधा भी चमक गया है।