शाजापुर पहुंचे CM ने देखा बोमा पद्धति से कृष्ण मृगों का रेस्क्यू, बोले- अन्य राज्यों में भी चलेगा अभियान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को शाजापुर जिले के रंथभंवर गांव पहुंचकर कृष्ण मृगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के अभियान के दूसरे चरण का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि यह अभियान अन्य राज्यों और जिलों में भी चलाया जाएगा।
Publish Date: Wed, 28 Oct 2026 11:14:11 AM (IST)Updated Date: Wed, 28 Oct 2026 11:14:11 AM (IST)
शाजापुर पहुंचे CM ने देखा बोमा पद्धति से कृष्ण मृगों का रेस्क्यू। -नईदुनियाHighLights
- CM ने कहा कि यह अभियान अन्य राज्यों और जिलों में भी चलाया जाएगा
- CM ने अभियान के दूसरे चरण का जायजा लिया
- अधिकारियों से अभियान की प्रगति और व्यवस्थाओं की जानकारी ली
नईदुनिया प्रतिनिधि, शाजापुर : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को शाजापुर जिले के रंथभंवर गांव पहुंचकर कृष्ण मृगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के अभियान के दूसरे चरण का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि यह अभियान अन्य राज्यों और जिलों में भी चलाया जाएगा।
मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से गांव के अस्थायी हेलीपैड पहुंचे और वहां से सड़क मार्ग से बोमा स्थल गए। उन्होंने वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से अभियान की प्रगति और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। बोमा पद्धति से कृष्ण मृगों के रेस्क्यू की प्रक्रिया भी देखी। विशेषज्ञों ने उन्हें इसकी जानकारी दी।
किसान कल्याण वर्ष के तहत यह संतोषजनक काम है
मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष के तहत यह संतोषजनक काम है। अभियान के जरिए वन्यजीवों को सुरक्षित ढंग से विभिन्न अभयारण्यों में छोड़ा जा रहा है। इससे किसानों को फसलों के नुकसान से राहत मिलेगी। नौ अक्टूबर से शुरू हुए अभियान में अब तक 1,275 कृष्णमृगों को बोमा पद्धति से पकड़कर विभिन्न अभयारण्यों में भेजा गया है। ग्राम बाड़ीगांव में सोमवार को 169 और मंगलवार को 111 वन्यजीवों का रेस्क्यू किया गया। इस तरह वहां दो दिनों में कुल 280 वन्यजीवों को रेस्क्यू किया गया। अभियान 31 अक्टूबर तक चलेगा।
अभियान से यह राहत
अभियान का उद्देश्य मानव-वन्यप्राणी द्वंद्व और फसलों को होने वाली क्षति कम करना, प्रभावित ग्रामीण समुदायों को राहत देना और वन्यजीवों को उपयुक्त वन्य आवास में सुरक्षित स्थानांतरित करना है। दूसरे चरण में कृष्णमृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य 2,000 रखा गया है। दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञ संस्था कंजर्वेशन सॉल्यूशंस तकनीकी सहयोग दे रही है। पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों और मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रशिक्षित मैदानी कर्मचारी रेस्क्यू, हैंडलिंग और परिवहन में जुटे हैं।
यहां किए जा रहे स्थानांतरित
जिले से पकड़े गए कृष्णमृग और नीलगाय कूनो नेशनल पार्क श्योपुर, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व सागर, गांधी सागर अभ्यारण्य मंदसौर भेजे जा रहे हैं। इन अभ्यारण्य में बड़ी संख्या में शेर, चीता और तेंदुआ व अन्य वन्य जीव हैं।
फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं वन्यजीव
वन्य जीव कृष्णमृग और नीलगाय द्वारा किसानों की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया जाता है। इससे राहत दिलाने के लिए ही वन विभाग द्वारा जिले में पिछले वर्ष पहली बार अभियान चलाकर नीलगाय और कृष्णमृग पकड़कर अन्यत्र छोड़े थे। पहले अभियान को मिली सफलता के बाद अब एक बार फिर अभियान चलाया जा रहा है।
काम आ रहा अनुभव
पिछले वर्ष अभियान के दौरान प्रदेश के वन अमले के वरिष्ठ अफसरों से लेकर मैदानी अमले तक ने वन्यजीव पकड़ने की दक्षिण अफ्रीका की टीम की तकनीक को समझा और बारीकियां सीखीं। दक्षिण अफ्रीका की टीम के मार्गदर्शन में चलाए गए अभियान में शाजापुर जिले के साथ ही मंदसौर नीमच रतलाम देवास राजगढ़ उज्जैन व अन्य कुछ जिले की वन विभाग टीम ने अभियान में हिस्सा लिया और तकनीक सीखी थी। टीम में पायलट, चिकित्सक, वाहन चालक भी शामिल थे। जिसका लाभ इस वर्ष मिल रहा है।
बीते वर्ष लक्ष्य से दोगुना कृष्णमृग पकड़े थे
बीते वर्ष जिले में चला अभियान प्रदेश में पहली बार था। जिसमें ग्रामीण रहवासी क्षेत्र में हेलीकॉप्टर की मदद से बोमा तकनीक से वन्यजीव पकड़े गए। सरकार ने इसे पायलट प्रोजेक्ट के रुप में प्रारंभ किया था। 20 दिवसीय अभियान में सकारात्मक परिणाम सामने आने पर कृष्मण मृग पकड़ने के लक्ष्य में वृद्धि भी की गई। शुरूआती लक्ष्य 400 कृष्णमृग पकड़ने का था, किंतु सफल परिणाम को देखते हुए अतिरिक्त अनुमित ली गई और लक्ष्य से दोगुने से ज्यादा 846 कृष्णमृग और 67 नीलगाय पकड़कर प्रदेश के विभिन्न अभयारण्य में छोड़ा गया था।