• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्यप्रदेश
  • शाजापुर

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 14, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पांडवकालीन है नलखेड़ा में मां बगलामुखी का विश्‍व प्रसिद्ध मंदिर

बगलामुखी माता मूलत: तंत्र की देवी हैं इसलिए यहां पर तांत्रिक अनुष्ठानों का महत्व अधिक है।

By Edited By:
Publish Date: Sun, 14 Oct 2018 07:03:05 PM (IST)Updated Date: Sun, 14 Oct 2018 11:28:39 PM (IST)
पांडवकालीन है नलखेड़ा में मां बगलामुखी का विश्‍व प्रसिद्ध मंदिर

शाजापुर। मध्यप्रदेश के आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में मां बगलामुखी का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है। मां बगलामुखी का महत्व समस्त देवियों में सबसे विशिष्ट है। विश्व में इनके सिर्फ तीन ही महत्वपूर्ण प्राचीन मंदिर हैं, जिन्हें सिद्धपीठ कहा जाता है। उनमें से एक नलखेड़ा में है।

अन्य दो ऐतिहासिक मंदिर दतिया (मप्र) और कांगड़ा (हिमाचल) में है। नलखेड़ा आगर जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर इंदौर- कोटा रोड पर स्थित है। नजदीकी रेलवे स्टेशन उज्जैन से दूरी 95 किमी है।

आस्था : तीन मुख वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी का यह मंदिर लखुंदर नदी के कि नारे है। पांडव कालीन यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक है। यहां देशभर से शैव और शाक्त मार्गी साधु-संत, तांत्रिक सहित देश-विदेश के कई श्रद्धालु पूजन के लिए आते हैं।


मंदिर में बगलामुखी के अतिरिक्त मां लक्ष्मी, सरस्वती, देवी चामुंडा, भगवान श्रीकृष्ण, श्री हनुमान, श्रीकाल भैरव एवं शिव परिवार भी विराजमान हैं। मान्यता है कि मंदिर की स्थापना महाभारत काल में कौरवों पर विजय पाने के लिए भगवान कृष्ण के निर्देश पर पांडवों ने की थी। यह बगलामुखी प्रतिमा स्वयंभू है। बगलामुखी माता मूलत: तंत्र की देवी हैं इसलिए यहां पर तांत्रिक अनुष्ठानों का महत्व अधिक है। मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार सिंहमुखी है। मंदिर परिसर में 36 फीट ऊंची दीपमालिका भी है। मंदिर परिसर में सोलह खंबों का सभा मंडप है।