18 करोड़ से संवरेगी श्योपुर की शीप नदी की सूरत, तीन सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से रुकेगा गंदे नालों का पानी
परियोजना के लिए टेंडर जारी हो चुके हैं और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
Publish Date: Fri, 23 Oct 2026 04:22:45 PM (IST)Updated Date: Fri, 23 Oct 2026 04:23:22 PM (IST)
नालों की गंदगी डाले जाने के कारण नदी का स्वरुप इस तरह गंदे नाले में होने लगा परिवर्तित। नईदुनियाHighLights
- 18 करोड़ रुपये की लागत से लगेंगे प्लांट
- बंजारा डैम, किला और वार्ड-10 में बनेंगे एसटीपी
- लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट से होगा पानी का उपचार
नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर। गंदे नालों की गंदगी डाले जाने से दुर्दशा का शिकार हो रही श्योपुर की जीवनदायिनी सीप नदी की सूरत 18 करोड़ रुपये की लागत से संवारी जाएगी। नदी को गंदे नालों और कचरे के दंश से मुक्ति दिलाने के लिए शहर के तीन अलग-अलग स्थानों पर तीन सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे। प्लांटों की मदद से नालों के दूषित पानी को उपचारित करने के बाद ही नदी में प्रवाहित किया जाएगा। परियोजना के लिए टेंडर जारी हो चुके हैं और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
नदी पर लगातार बढ़ता जा रहा है अपशिष्ट का दबाव
यहां बता दें कि, श्योपुर शहर में आबादी बढ़ने के साथ घरेलू गंदे पानी और नालों से आने वाले अपशिष्ट का दबाव नदी पर लगातार बढ़ता जा रहा है। नतीजतन, स्वच्छ जलधारा के बजाय इसके कई हिस्से गंदगी से प्रभावित होने लगे हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब नगर पालिका श्योपुर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने की योजना पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
तीन स्थानों पर बनेंगे प्लांट
परियोजना के तहत शहर में तीन स्थानों पर प्लांट बनाए जाएंगे। इनमें बंजारा डैम, किले के निचले इलाके और वार्ड क्रमांक 10 को शामिल किया गया है। इन इकाइयों के निर्माण पर कुल 18 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है। नगर पालिका ने इसके लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। जल्द निर्माण शुरू होने की संभावना है।
नालों का पानी सीधे नदी में नहीं पहुंचेगा वल्कि फिल्टर करके डाला जाएगा
वर्तमान समय में शहर के विभिन्न हिस्सों से निकलने वाला दूषित पानी नालों के जरिए शीप नदी तक पहुंच रहा है। इससे जल की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में गंदे पानी को उपचारित करने के लिए संबंधित प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। वहां आवश्यक प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही पानी नदी में छोड़ा जाएगा। इससे अनुपचारित अपशिष्ट का प्रवाह रोकने और प्रदूषण का दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट से होगा गंदे पानी का उपचार
योजना में लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट पद्धति का उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन और उपचार करने पर जोर रहेगा। तीनों स्थानों पर प्रस्तावित इकाइयों का उद्देश्य शहर के अलग-अलग हिस्सों से निकलने वाले दूषित पानी को नियंत्रित करना है, ताकि उसका सीधा प्रवाह नदी में न हो। हालांकि, परियोजना की वास्तविक सफलता प्लांट के निर्माण के साथ नालों को उनसे जोड़ने, नियमित संचालन और उपचारित पानी की गुणवत्ता बनाए रखने पर निर्भर करेगी।
नदी को पुराने स्वरूप में लौटाने की उम्मीद
शीप नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि शहर के पर्यावरण और स्थानीय जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। इसमें लगातार गंदगी पहुंचने से जलीय पर्यावरण, आसपास के क्षेत्र और स्वच्छता पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे में 18 करोड़ रुपये की यह परियोजना नदी संरक्षण की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।
जीवनदायिनी सीप नदी में नालों का गंदा पानी जाने से रोकने के लिए शहर में तीन प्लांट बनाए जाएंगे, 18 करोड़ रुपये की लागत से यह काम किया जाएगा, टेंडर जारी हो चुके हैं। जल्द काम शुरु हो जाएगा, इसके बाद नदी का स्वरुप निखरकर अपने वास्तविक रुप में आ जाएगा। - रेणु-सुजीत गर्ग, अध्यक्ष नपा, श्योपुर