
विजयपुर(नईदुनिया न्यूज)।
विजयपुर तहसील की ग्राम पंचायत गोहरा में पिछले 15 दिन में 3 दर्जन से अधिक भैंस की मौत हो चुकी है। इससे ग्रामीणों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। ग्रामीण अपने मवेशी को अब गांव से बाहर ले जा रहे हैं। लगातार मवेशी की मौत के बाद पशु चिकित्सा विभाग ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है, कि मवेशी की मौत खुरपका-मुंहपका बीमारी के कारण हो रही है। इधर विभाग के जिम्मेदार बीमारी
हरा चारा भी बना पशुओं के लिए आफत
पशु चिकित्सक डॉ. घनश्याम गहलोत के अनुसार इन दिनों सर्दी अधिक होने के साथ ही हरा चारा खाने से पशुओं में जानलेवा बीमारी मुंहपका हो रही है, जिससे पशुओ का समय पर इलाज न होने के कारण मौत हो रही है। यह एक वायरल बीमारी है, इसका टीकाकरण भी चल रहा है, लेकिन ग्रामीण पशुओं में टीकाकरण नहीं करवा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार बीमार पशुओं की संख्या 38 बताई गई है जिनका इलाज चल रहा है।
इन ग्रामीणों के मवेशी की हो चुकी है मौत
ग्रामीणों के अनुसार बीमारी से ग्रामीण रतीराम धाकड़ एक भैंस, प्रहलाद धाकड़ की एक, आदिराम धाकड़ की 1, सुमेर धाकड़ की 2 भैंस, बाइसराम धाकड़ की 1, उम्मेद धाकड़ की 2, सिद्धार्थ धाकड़ की 1, श्रीनिवास धाकड़ की 1 भैंस, भागीरथ जाटव की 2 भैंस, जगराम जाटव 1 भैंस, सुग्रीव जाटव 2 भैंस, महाराज सिंह बघेल 2, सुरेंद्र धाकड़ 1, सनेश कुशवाहा की 1, देवीलाल कुशवाहा की 1, राजेंद्र कुशवाह की 1, श्रीधर धाकड़ 1 गाय, रिंकू गोस्वामी -1 भैंस, अशोक जाटव की 3 बकरी, बंटी गोस्वामी का 1 बछड़ा, चिरौंजी धाकड़ की एक भैंस की मौत हो चुकी है।
यह है रोग -
खुरपका-मुंहपका रोग कीड़े से होता है, जिसे आंखें नहीं देख पाती हैं। इसे विषाणु कहते हैं। यह रोग किसी भी उम्र की गाय व भैंस में हो सकता है। हालांकि, यह रोग किसी भी मौसम में हो सकता है। इसके चपेट में आने से पशु सूख जाता है। उसकी कार्य व उत्पादन क्षमता कम हो जाती है। टीकाकरण से ही रोग की रोकथाम की जा सकती है। एफएमजी का टीका साल में दो बार लगवाना चाहिए। ताकि बीमारी पशुओं के पास तक न फटकने पाए।
रोग के लक्षण -
इस रोग की चपेट में आने पर पशु को तेज बुखार आता है। पशु के मुंह, मसूड़े, जीभ के ऊपर, होंठ के अंदर व खुरों के बीच छोटे-छोटे दाने उभर आते हैं। दाने आपस में मिलकर बड़ा छाला बनाते हैं। छाला फटने पर वहां जख्म हो जाता है। पशु जुगाली बंद कर देते हैं। मुंह से लार गिरने लगती है। वह सुस्त होकर खाना पीना तक छोड़ देता है। खुर में जख्म होने पर वह लंगड़ाकर चलता है। खुरों में कीचड़ लगने पर कीड़े पड़ जाते हैं और कभी-कभी मौत का कारण भी बनता है।
वर्जन -
मेरी चार भैंस है उनमें से दो की बीमारी के कारण मौत हो गई है। दो बीमार हैं। हमने इलाज भी कराया, लेकिन डॉक्टरों को भी बीमारी का पता नही चल पा रहा है।
उम्मेद धाक़ड़,पीड़ित ग्रामीण गोहरा
वर्जन -
हमारी टीम गांव में लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। साथ ही कैंप लगाकर पशुओं की जांच एवं टीकाकरण करवा रही है। हालांकि पशु बीमारी के चलते कुछ पशुओं की मौत भी हुई है। जांच के लिए हमने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा भी है वहां से जांच टीम आएगी
डॉ. घनश्याम गहलोत, पशु चिकित्सक अधिकारी विजयपुर