
नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर। कूनो वनमंडल के विजयपुर पूर्व रेंज स्थित नितनवास बीट में एक चीते को शिकारियों द्वारा गोली मारने की आशंका से वन महकमे में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार, चीते के पैर में गंभीर चोट है और उसे शिकारियों द्वारा उपयोग की जाने वाली टोपी वाली बंदूक की गोली के तीन छर्रे लगे हैं। उसकी मौत होने की सूचना भी सामने आई है, हालांकि वन विभाग के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
मामले की जांच के लिए भोपाल एसटीएफ और मुरैना-शिवपुरी की डॉग स्क्वाड टीम मौके पर पहुंची है। वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी घटनास्थल पर जुटे हैं। हालांकि, चीते की मौत हुई है या उसकी स्थिति क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
बताया जा रहा है कि इसी क्षेत्र में पहले भी शिकारियों द्वारा तेंदुए का शिकार किए जाने का मामला सामने आया था। उस घटना में वन विभाग ने प्रकरण दर्ज किया था। अब चीते को गोली लगने की सूचना ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच टीम घटनास्थल पर पहुंचकर मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। एक दिन पहले ही श्योपुर क्षेत्र में ही दो चीतों ने एक घर के बाहर बंधे बछड़े का शिकार किया था।
ऐसे में अंदेशा इस बात का भी जताया जा रहा है कि शायद दहशत में आए अंचल के इस क्षेत्र में किसी ग्रामीण ने चीते पर हमला किया हो। शावक निर्वा के 19 माह के नर शावकों में से एक है।
कूनो प्रबंधन के अनुसार निगरानी दल ने रविवार शाम शावक को मुरैना प्रादेशिक वन मंडल के समीप जंगल में देखा था। निगरानी दल की नजर पड़ने के बाद उसे रेस्क्यू कर चिकित्सकीय परीक्षण के लिए कूनो पहुंचाया गया। अगले 72 घंटे तक चीते की स्थिति के बारे में कुछ भी कहना संभव नहीं है। ऐसे में चीते की मौत और उसे गोली लगने की परिस्थितियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविकता सामने आ सकेगी।
बता दें कि 12 अक्टूबर को ही आशा चीता के आठ माह के शावक के अलावा 21 सितंबर को चीता गौरव की मौत हुई थी। ऐसे में चीता निर्वा के शावक पर हमले ने चिंता बढ़ा दी है। वन्य जीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने भी एक्स पर पोस्ट कर चीते के शिकार को लेकर ही पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा है कि पहले ही तेंदुओं के शिकार की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई थी और कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।