
नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर। कूनो नेशनल पार्क में 6 तेंदुओं के शिकार के बाद विशेष निगरानी में रहने वाले चीता के शिकार की घटना ने कूनो और आसपास के जंगल में वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था के साथ वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में एसटीएफ ने दो आरोपित शिकारियों को गिरफ्तार कर अपनी कार्रवाई का दावा किया, लेकिन जंगलों में सक्रिय अन्य शिकारियों, अवैध कटाई करने वालों और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
केंद्र से लेकर राज्य स्तर तक की टीमें श्योपुर पहुंचीं। उन्होंने कूनो सहित सामान्य वन मंडल के जंगलों की स्थिति देखी, अवैध कटाई और वन्यजीवों के शिकार से जुड़ी शिकायतें सुनीं, लेकिन उनके लौटने के बाद कार्रवाई का दायरा दो गिरफ्तारियों तक ही सिमटा नजर आ रहा है।
इस पूरे मामले में आरटीआई एक्टिविस्ट एवं वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे ने एसटीएफ की आधिकारिक प्रेस रिलीज पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि चीते के मुख्य शिकार क्षेत्र में बंदूक के लाइसेंस जारी होना चीता प्रोजेक्ट की बड़ी खुफिया विफलता है। उनका आरोप है कि एसटीएफ ने न्यायालय में सुनवाई से पहले ही अपने निष्कर्षों को अंतिम रूप में प्रस्तुत करने जैसा रुख अपनाया है।
दुबे ने मामले में गंभीर खामियां बताते हुए सीधे सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय वन मंत्रालय, एनटीसीए, डब्ल्यूसीसीबी और मध्यप्रदेश के डीजीपी को भी टैग किया है।
अजय दुबे ने 30 अक्टूबर 2026 को भेजे गए पत्र के बाद एनटीसीए को दूसरा सप्लीमेंटल रिप्रजेंटेशन भेजकर चीता प्रोजेक्ट का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है। इसमें चीतों की सिग्नल ट्रैकिंग व्यवस्था ठप होने, रिजर्व से बाहर निकलने पर समय पर सूचना नहीं मिलने और अंतर-वन मंडलीय समन्वय की कमी के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा से जुड़े शो-कॉज नोटिसों के जवाब लंबित होने तथा शुभरंजन सेन की ओर से अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।
दुबे ने स्वतंत्र ऑडिट, प्रशासनिक लापरवाही की जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और किसानों के लिए त्वरित मुआवजा व्यवस्था की मांग की है। अब सवाल यही है कि जब शिकारियों तक पहुंचने के लिए जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं, तो कूनो के सुरक्षा और निगरानी तंत्र की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों से जवाब-तलब क्यों नहीं हुआ? तेंदुए के शिकार से लेकर चीता को गोली मारने की घटना सामने आई, बावजूद जवाबदेही तय नहीं होना वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रहा है। इस मामले में वन विभाग के आला अधिकारी तक कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।