कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट के 4 साल पूरे: कल मनेगा ‘चीता उत्सव’, 3 जगह जुटेंगे 600 चीता मित्र
कूनो के CCF के मुताबिक, एक मादा चीता को गांधीसागर राष्ट्रीय अभयारण्य में शिफ्ट करने की तैयारी थी, मंगलवार देर रात तक इस संबंध में अधिकारिक स्वीकृति नह...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 15 Sep 2026 10:01:43 PM (IST)Updated Date: Tue, 15 Sep 2026 10:02:24 PM (IST)
HighLights
- चीता उत्सव और संवाद कार्यक्रम
- कूनो में 49 हुई चीतों की संख्या
- गांधीसागर शिफ्टिंग फिलहाल टली
नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर। चीता पुनर्वास परियोजना के चार साल पूरे होने पर गुरुवार को वन विभाग ‘चीता उत्सव’ मनाएगा। मुख्य कार्यक्रम कूनो नेशनल पार्क के बाहर सेसईपुरा के आसपास रखा गया है। वहीं तीन अलग-अलग स्थानों पर करीब 200-200 चीता मित्रों को जुटाकर सम्मेलन किए जाने की तैयारी है।
कूनो नेशनल पार्क के सीसीएफ उत्तम शर्मा कुमार शर्मा ने कहा कि एक मादा चीता को गांधीसागर राष्ट्रीय अभयारण्य में शिफ्ट करने की तैयारी थी, मंगलवार देर रात तक इस संबंध में अधिकारिक स्वीकृति नहीं हो पाने से फिलहाल असमंजस है।
शिफ्टिंग फिलहाल टलने की संभावना है, क्योंकि कूनो के अधिकारियों को वन्यजीव को एक स्थान से दूसरे क्षेत्र में भेजने के लिए वाहन व्यवस्था, विशेषज्ञों की टीम, सुरक्षा इंतजाम और रूट प्लान तैयार करना पड़ता है। इन सभी तैयारियों में समय लगता है। इसलिए अनुमति मिलने के बाद भी तत्काल स्थानांतरण संभव नहीं माना जा रहा है।
चीता मित्रों से संवाद पर जोर
वर्षगांठ के आयोजनों में स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता को प्रमुखता दी जाएगी। तीन स्थानों पर होने वाले सम्मेलनों में चीता मित्रों से परियोजना को लेकर संवाद किया जाएगा। चीतों की निगरानी, ग्रामीणों की भूमिका, वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके साथ पर्यावरण जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां भी होंगी।
बता दें कि भारत में चीता पुनर्स्थापना की महत्वाकांक्षी योजना के तहत 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ चीते कूनो लाए गए थे। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से 12 और बोत्सवाना से नौ चीते यहां लाए जा चुके हैं। शावकों के जन्म के साथ कूनो नेशनल पार्क में कुल 49 चीते मौजूद हैं।
इनमें से 19 वयस्क और 30 शावक हैं। इनमें से 17 शावक एक वर्ष से कम उम्र के हैं। 13 एक साल से ज्यादा बड़े हैं। इनके गले पर कालर आइडी लगा दी गई है। तीन चीते गांधीसागर राष्ट्रीय अभयारण्य में रह रहे हैं।