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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 14, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Cheetah Project Timeline: जानिये मध्‍य प्रदेश के कूनो पार्क में कब लाए गए थे चीते, कैसे नामकरण हुआ, कब-कब हुई मौत

Cheetah Project Timeline: अब तक नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 20 चीतों में से 6 की मौत हो चुकी है। इनके अलावा भारत में पैदा हुए चार में से तीन ...और पढ़ें

By Navodit SaktawatEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Fri, 14 Jul 2023 06:07:46 PM (IST)Updated Date: Wed, 02 Aug 2023 06:04:57 PM (IST)
Cheetah Project Timeline: जानिये मध्‍य प्रदेश के कूनो पार्क में कब लाए गए थे चीते, कैसे नामकरण हुआ, कब-कब हुई मौत

Cheetah Project Timeline: कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। नामीबिया से लाई गई मादा चीता धात्री की मौत हो गई। बुधवार को उसका शव जंगल में पड़ा मिला। धात्री चीता को पीएम मोदी ने 17 सितंबर को अपने जन्मदिन पर कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा। अब तक नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 20 चीतों में से 6 की मौत हो चुकी है। इनके अलावा भारत में पैदा हुए चार में से तीन शावकों की मौत भी हो चुकी है। यानी अब तक कुल 9 चीतों की मौत कूनो नेशनल पार्क में हो चुकी है। मौजूदा हालात में एक शावक सहित 13 चीते बड़े बाडे़ में रह रहे हैं। एक मादा चीता निर्वा अभी कूनो से बाहर है जिसकी लोकेशन मिल गई है, जिसे एक-दिन में पकड़कर बाड़े में बंद करने का धावा अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। यहां जानिये कि यह प्रोजेक्‍ट कब शुरू हुआ था, चीतों के नामकरण की क्‍या प्रक्रिया थी और अभी तक कितने चीतों की मौत हो चुकी है।

कब लाए गए थे चीते

-17 सिंतबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते लाकर भारत में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई। इनमें तीन नर और पांच मादी थीं।

- 750 वर्ग किलो मीटर में फैले कूनो नेशनल पार्क में बने बाडो़ं में इन चीतों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन चीतों को छोड़ा।

- 18 फरवरी को दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीते, जिसमें 7 नर और 05 मादा शामिल है।

- 450 से ज्यादा चीता मित्र चीतों की सुरक्षा व ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए वन विभाग ने तैयार किए हैं।

- 91 करोड़ से अधिक रूपये चीता प्रोजेक्ट पर कुल खर्च किए गए थे।

ऐसे हुआ था नामकरण

चीतों के नामीबियाई और दक्षिण अफ्रीकी नाम की जगह भारतीय नाम रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 सितंबर 2022 को मन की बात कार्यक्रम में देश के नागरिकों से चीतों के नए नाम सुझाने के बारे में अनुरोध किया था। इस संबंध में भारत सरकार के प्लेटफॉर्म mygov.in पर 26 सितंबर से 31 अक्टूबर 2022 तक एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस प्रतियोगिता में कुल 11,565 प्रविष्टियां प्राप्त हुई, जिनमें देश में लाए गए इन चीतों के नए नाम सुझाए गए थे। इन प्राप्त प्रविष्टियों की एक चयन समिति द्वारा जांच की गई और सुझाए गए नामों के संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों के महत्व और प्रासंगिकता के आधार पर नामों का चयन किया गया है। इसकी घोषणा 20 अप्रैल 2023 को की गई।


कूनो में चीतों की कब-कब हुई मौत

- पहली मौत 26 मार्च 2023 मादा चीता साशा को किडनी इन्फेक्शन हुआ और मौत हो गई। 22-23 जनवरी को ही इसके बीमार होने का पता चला था, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिल पाया। वन विभाग ने तर्क दिया कि भारत‌ आने से पहले ही 15 अगस्त 2022 को ही नामीबिया में साशा का ब्लड टेस्ट किया गया था, जिसमें क्रिएटिनिन का स्तर 400 से ज्यादा था।

- दूसरी मौत 23 अप्रैल 2023 नर चीता उदय की मौत को लेकर वन विभाग ने दावा किया कि वो पहले से ही बीमार था। मौत कार्डियक आर्टरी फेल होने की वजह से हुई।

- तीसरी मौत 9 मई को मादा चीता दक्षा को बाड़े में मेटिंग के लिए भेजा गया था। मेटिंग के दौरान ही दक्षा घायल हो गई और बाद में उसकी मौत हो गई।

- चौथी मौत 23 मई 2023 नामीबिया से लाई गई ज्वाला के एक शावक की मौत हुई। ज्यादा गर्मी, डिहाइड्रेशन और कमजोरी को वजह बताया गया।

- पांचवीं और छठवीं मौत 25 मई 2023 ज्वाला के दो और शावकों की मौत। अधिक तापमान और लू के चलते तबीयत खराब होने की बात सामने आई। फिर दोनों की मौत हो गई।

- सातवीं मौत 11 जुलाई 2023 साउथ अफ्रीका से लाए गए नर चीते तेजस को लेकर वन विभाग ने कहा कि उसकी मौत गर्दन पर चोट और इन्फेक्शन से हुई। बाद में पीसीसीएफ जेएस चौहान ने मीडिया को बताया कि कॉलर आईडी की वजह से गले में इन्फेक्शन हुआ था।

- आठवीं मौत 14 जुलाई 2023 साउथ अफ्रीका से लाए गए एक और नर चीते सूरज की मौत पर वन विभाग का कहना था कि मौत की वजह गर्दन और पीठ पर घाव होना है। बाद में मौत की वजह कालर आईडी को ही बताया गया।