दोस्ती निभाने में भी अव्वल चीते, बचपन का साथ पूरी जिंदगी तक रहता है कायम, अग्नि-वायु और प्रभाष-पावक के बाद अब ज्वाला के दो शावक भी बने जिगरी दोस्त
जंगल के सबसे तेज शिकारी माने जाने वाले चीते केवल अपनी रफ्तार के लिए ही नहीं, बल्कि दोस्ती निभाने के लिए भी जाने जाते हैं।
Publish Date: Thu, 09 Jul 2026 07:22:39 PM (IST)Updated Date: Thu, 09 Jul 2026 07:24:52 PM (IST)
HighLights
- नर चीते अक्सर गठबंधन बनाकर रहते हैं
- बाहरी दखल कई बार आक्रामक व्यवहार का कारण
- अधिकांश नर चीते सगे भाई या बचपन के साथी हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर। जंगल के सबसे तेज शिकारी माने जाने वाले चीते केवल अपनी रफ्तार के लिए ही नहीं, बल्कि दोस्ती निभाने के लिए भी जाने जाते हैं। एक बार जिस चीते से दोस्ती हो जाए, उसका साथ वह पूरी जिंदगी नहीं छोड़ते।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भी ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल रहे हैं, जहां बचपन में साथ पले-बढ़े नर चीते आज भी एक-दूसरे के साथ रहते हैं। वे साथ-साथ घूमते हैं, साथ शिकार करते हैं और शिकार को मिलकर खाते हैं।
नर चीते अक्सर गठबंधन बनाकर रहते हैं
वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि नर चीते अक्सर कोएलिशन (गठबंधन) बनाकर रहते हैं। यह गठबंधन अधिकांश मामलों में सगे भाइयों या बचपन के साथियों का होता है। कूनो पार्क में गौरव-शौर्य, अग्नि-वायु और प्रभाष-पावक जैसी जोड़ी इसकी मिसाल है।
अब मादा चीता ज्वाला के दो नर शावकों के बीच भी ऐसी ही गहरी दोस्ती विकसित हो रही है और दोनों हमेशा साथ-साथ देखे जा रहे हैं। चीतों की दोस्ती इतनी मजबूत होती है कि कई बार वे अपने साथी के बीच किसी तीसरे की मौजूदगी भी पसंद नहीं करते।
बाहरी दखल कई बार आक्रामक व्यवहार का कारण बन सकता है
पिछले महीनों कूनो में गौरव और शौर्य के समूह के पास पहुंची एक मादा चीता पर चीतों ने हमला कर दिया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि नर चीतों के गठबंधन में बाहरी दखल कई बार आक्रामक व्यवहार का कारण बन सकता है।
प्रभाष और पावक अब गांधीसागर अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए नर चीते प्रभाष और पावक अब कूनो में नहीं हैं। इन्हें अप्रैल 2025 में कूनो से स्थानांतरित कर गांधी सागर अभयारण्य भेजा गया था। दोनों को वहां चीता पुनर्स्थापन परियोजना के दूसरे केंद्र की आधार आबादी के रूप में बसाया गया है।
दोनों चीते वहां भी साथ-साथ देखे गए हैं
बाद में सितंबर 2025 में मादा चीता धीरा को भी गांधी सागर भेजा गया, ताकि प्रभाष और पावक के साथ प्राकृतिक प्रजनन शुरू हो सके और कूनो के बाहर भी चीता आबादी विकसित की जा सके। बताया गया है कि दोनों चीते वहां भी साथ-साथ देखे गए हैं।
अधिकांश नर चीते सगे भाई या बचपन के साथी हैं
कूनो में साथ रहने वाले अधिकांश नर चीते सगे भाई या बचपन के साथी हैं। उनके बीच स्वाभाविक रूप से मजबूत सामाजिक संबंध विकसित हो जाते हैं। यही कारण है कि वे लंबे समय तक एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते और जंगल में एक टीम की तरह व्यवहार करते हैं।
-डॉ: समीता राजोरा, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ