
नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के सेवन से हुई मौतों ने यह साफ कर दिया है कि पेयजल में थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। इसके बावजूद श्योपुर शहर में हालात किसी चेतावनी से कम नहीं हैं। यहां नगरपालिका की लापरवाही के चलते गंदे नालों, नालियों के बीच से गुजर रही पाइपलाइनों के जरिए लोगों के घरों तक पीने का पानी पहुंच रहा है।
नईदुनिया ने जब शहर के विभिन्न वार्डों में रियलिटी चेक किया, तो ऐसे हालात सामने आए जिन्होंने इंदौर की घटना की याद ताजा कर दी। शहर के कम से कम सात वार्डों में जल प्रदाय व्यवस्था सीधे तौर पर जलजनित बीमारियों को न्योता दे रही है।
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कुम्हार मोहल्ला: यहां घरों में सप्लाई होने वाले नलों की पाइपलाइन खुले गंदे नाले के अंदर से गुजरती मिली। नाले में जमा गंदगी और सीवेज किसी भी समय पानी में मिल सकता है।
किला नीचे क्षेत्र: इस इलाके में भी नालियों के भीतर से पाइपलाइन निकाली गई है। स्थानीय लोग बताते हैं कि बारिश के दिनों में नालियां उफनती हैं और पानी की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है।
वार्ड क्रमांक 13, 14 और 15 गांधीनगर-मुक्तिनाद नगर: यहां कई जगह पाइपलाइन नालों के बीच दबाई गई है। कहीं लीकेज है तो कहीं पाइप पूरी तरह असुरक्षित स्थिति में है।
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वार्ड क्रमांक 17 आदिवासी बस्ती: सबसे ज्यादा गंभीर स्थिति यहीं है। गंदे नालों के बीच से गुजरती पाइपलाइन से सीधे घरों में पानी सप्लाई हो रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि यहां जलजनित बीमारी कभी भी बड़े रूप में फैल सकती है।
एकीकृत बस स्टैंड के पीछे की बस्ती और कुम्हारखेड़ली: इन इलाकों की कई गलियों में हालात अलग नहीं हैं। यहां भी पाइपलाइन खुले नालों के संपर्क में है।
रविवार को अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय और डिप्टी कलेक्टर विजय शाक्य ने शहर के कई इलाकों का दौरा कर जल प्रदाय व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान वार्ड 10, 13, 15, 17, 01 और भोई मोहल्ला में जल स्त्रोतों, पाइपलाइनों और नल कनेक्शनों का अवलोकन किया गया। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान नगरपालिका की टीम ने अफसरों को अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थान दिखाए, जबकि कई खतरनाक पाइंट्स अब भी जस के तस बने हुए हैं।
गंदे नालों के संपर्क में आने वाला पानी सीधे तौर पर जलजनित बीमारियों का कारण बनता है। ऐसे पानी के सेवन से उल्टी-दस्त, बुखार, टाइफाइड, हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
-डॉ. जितेंद्र यादव, वरिष्ठ चिकित्सक, जिला अस्पताल श्योपुर
पेयजल से जुड़ी शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर 07530-222631 जारी किया गया है। कलेक्ट्रेट कंट्रोल रूम में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
पेयजल की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पानी की टंकियों की नियमित सफाई, सैंपल जांच और पाइपलाइन की सतत निगरानी के कड़े निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं पेयजल लाइन गंदे नालों, नालियों के संपर्क में पाई गई तो इसे गंभीर लापरवाही माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी और कर्मचारी सीधे जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। हम मॉनीटरिंग कर रहे हैं।
-अर्पित वर्मा, कलेक्टर, श्योपुर