कूनो में चीते की मौत पर उठे गंभीर सवाल, तेंदुओं के बाद अब शिकारियों के निशाने पर आए वन्यजीव
यदि तेंदुओं के शिकार के बाद निगरानी व्यवस्था की समीक्षा व जवाबदेही तय कर सख्ती की गई होती तो इस घटना को रोका जा सकता था।
Publish Date: Thu, 29 Oct 2026 08:08:39 AM (IST)Updated Date: Thu, 29 Oct 2026 08:15:03 AM (IST)
HighLights
- शिकारियों के सक्रिय क्षेत्र में मिला घायल शावक
- केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बनाई जांच टीम
- उच्च न्यायालय में सीबीआई जांच की उठी मांग
नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर। श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकले 19 माह के चीता शावक के शिकार के मामले में निगरानी तंत्र की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिस विजयपुर वन परिक्षेत्र में छर्रे लगने से घायल चीता मिला था, वहां शिकारी पहले से ही सक्रिय थे।
इस बात का राजफाश जुलाई माह में आगरा में 10 तेंदुओं के अवशेषों के साथ पकड़े गए शिकारियों से पूछताछ में हुआ था। इसके बावजूद सुरक्षा को लेकर मैदानी अमला चीतों की ट्रैकिंग तक ही सीमित रहा।
यदि तेंदुओं के शिकार के बाद निगरानी व्यवस्था की समीक्षा व जवाबदेही तय कर सख्ती की गई होती तो इस घटना को रोका जा सकता था।
तेंदुए के शिकारियों ने ही चीते पर गोली चलाई!
हालांकि प्रबंधन अभी शिकारियों को लेकर चुप्पी साधे है किंतु यह जानकारी मिली है कि तेंदुए के शिकारियों ने ही चीते पर गोली चलाई। घायल चीता शिकारियों के चंगुल में आ गया था परंतु कॉलर आईडी से ट्रैकिंग कर रहे वन अमले की पकड़ में आने के डर से शिकारी उसे छोड़कर भाग निकले। बता दें, विजयपुर वन परिक्षेत्र की नितनवांस बीट के पास चीता शावक रविवार को घायल अवस्था में मिला था। इसके शरीर में छर्रे पाए जाने के बाद जांच की क्षेत्र के शिकारियों पर केंद्रित हो गई।
जुलाई में पकड़े गए थे 4 तस्कर
दरअसल, श्योपुर-शिवपुरी के जंगल और उसके आसपास शिकारियों के कई गांव हैं। कूनो और आसपास के इलाकों में शिकार, वन्य जीवों के मांस की बिक्री तथा खाल और सींग की तस्करी के मामले भी सामने आते रहे हैं। जुलाई में आगरा के सैंया इलाके में आगरा वन प्रभाग, पुलिस व वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त टीम ने चार तस्करों को 10 तेंदुओं की खाल व अवशेषों के साथ पकड़ा था।
केंद्र ने भी बनाई जांच टीम
इस मामले की जांच के लिए केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने तीन सदस्यीय टीम बनाई है। इसमें राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के आईजी फारेस्ट और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के एडिशनल डायरेक्टर व रीजनल डिप्टी डायरेक्टर शामिल हैं। टीम कूनो, श्योपुर व मुरैना के जंगलों में आन-स्पाट जांच करेगी। सुरक्षा प्रोटोकाल और मानीटरिंग में चूक की समीक्षा करेगी। टीम रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगी, जिसके आधार पर राज्य को निर्देश दिए जाएंगे। राज्य सरकार द्वारा गठित एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) केंद्रीय टीम के साथ संयुक्त जांच करेगी।
सीबीआई जांच की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर
भोपाल के वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर कहा है कि घटना कूनो के बाहर जाने वाले चीतों की सुरक्षा और मौजूदा निगरानी तंत्र की दक्षता को लेकर चिंता पैदा करती है। केवल सीबीआई के नेतृत्व में फारेंसिक जांच ही सच सामने ला सकती है। केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया जाए।