
सुरेश वैष्णव, श्योपुर। देश में विलुप्त हो चुके चीतों को फिर से बसाने के लिए शुरू किए गए चीता पुनर्वास परियोजना के लिए शुक्रवार का दिन बेहद खास रहा। पुनर्वास परियोजना के बाद देश की धरती पर जन्मी पहली मादा शावक की पहली वर्षगांठ का उत्सव शुक्रवार को कूनो नेशनल पार्क में देखने लायक रहा। केक काटा गया।
लोगों ने हैप्पी बर्थ डे.... मुखी गाया। 29 मार्च 2023 को नामीबिया से लाई गई मादा शावक ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया था। भीषण गर्मी और प्रतिकूल मौसम के कारण इनमें से तीन शावकों को बचाया नहीं जा सका।
इस मादा शावक को कूनो के वन्य जीव विशेषज्ञों व पशु चिकित्सकों की कड़ी मेहनत व सतत निगरानी से बचाया जा सका। इसे अपनी मां ज्वाला से भी अलग रखा गया। शुक्रवार को केक सेरेमनी के दौरान इसका नाम ‘मुखी’ रखा गया। कूनो प्रबंधन ने इस मौके पर मुखी नाम से शार्ट वीडियो भी जारी किया है। वीडियो में मुखी के एक साल की जीवन यात्रा का वर्णन है। बता दें कि चीता पुनर्वास परियोजना के तहत नामीबिया से आठ चीते लाए गए थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्म दिवस 17 सितंबर 2022 को इन चीतों को कूनो नेशनल पार्क के क्वारंटाइन बाड़े में छोड़ा था। इसके बाद दूसरे चरण में दक्षिण अफ्रीका से चीते और लाए गए थे। 29 मार्च 2023 को जन्मी मुखी की हालत जन्म के समय बेहद नाजुक थी। जिसे बचा पाना चुनौती भरा था।
तमाम इंतजाम और डॉक्टरों की ओर से किए गए बेहतर देखरेख व उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार होता चला गया। इंसानी बच्चों से भी बेहतर इस शावक का ध्यान रखा गया था, इसका परिणाम यह हुआ कि, मादा चीता मुखी मौत को हराकर आज पूरे एक साल की हो गई है। वह पूरी तरह से स्वस्थ है।
भारत में आखिरी बार चीता 1947 में देखे गए। कई बार इसे भारत लाने के प्रयास हुए लेकिन यह प्रयास 2023 में फलीभूत हुए। पहले नामीबिया और फिर दक्षिण अफ्रीका से लाए गए कुल 20 चीतों की पुनर्स्थापना बड़ी चुनौती थी। मौसम की प्रतिकूलता और अन्य वजहों से चीतों की मौत हुई तो परियोजना पर काफी सवाल उठे। लेकिन सरकार के प्रयासों और चिकित्सकों की मेहनत से आज परियोजना सफल साबित हो रही है। भारत की धरती पर जन्मी मादा शावक मुखी इसकी प्रतीक है।
कूनो डीएफओ थिरूकुराल आर बताते हैं कि मादा शावक मुखी तबीयत बिगड़ने के बाद उसे मां से अलग रखा गया इसलिए छोटी सी उम्र से ही मुखी को एकाकी जीवन जीना पड़ा। मुखी को छोटा बोमा (50 वाइ 30 मीटर ) में रखा गया, वही उसका घर एवं खेल का मैदान बनाया गया।
मुखी किसी अन्य व्यक्ति के पास आने पर बोमा में छुप जाती है। मुखी ने भारतीय परिस्थितियों को बहुत अच्छी तरह से अनुकूलित किया। नवंबर महीने में खुद को घायल कर लिया था, उस समय तत्काल चिकित्सा तथा पशु चिकित्सकों की टीम और फील्ड स्टाफ के लगातार प्रयासों के कारण, वह अगले कुछ दिनों में अपनी चोटों से पूरी तरह से ठीक हो गई। अब भारत में जन्मे चीतों की संख्या विदेशी चीतों से ज्यादा हो गई है। वर्तमान में कूनो में जन्मे 14 शावक हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए चीतों की संख्या 13 है।
08 चीते लाए थे 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से- 12 चीते लाए गए 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से- 07 चीतों की मौत हो गई है अब तक इन 20 में से- 13 वयस्क चीते हैं अभी (6) नर व 7 सदा) कूनों में- 14 शावक है अभी कूनो नेशनल पार्क में।