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कूनो में 27 चीतों की मौत के बाद भी सच छिपा रहा प्रबंधन! इलाज और निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

श्योपुर समाचार: कूनो प्रबंधन की ओर से कभी भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से मृत्यु का कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। यही कारण है कि वन्यजीव कार्यकर...और पढ़ें

By Deepak DandotiyaEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Tue, 22 Sep 2026 08:31:01 PM (IST)Updated Date: Tue, 22 Sep 2026 08:32:26 PM (IST)
कूनो में 27 चीतों की मौत के बाद भी सच छिपा रहा प्रबंधन! इलाज और निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

HighLights

  1. अब तक 10 वयस्क चीते और 17 शावक गंवा चुके हैं जान
  2. समय पर बीमारी ट्रैक न होने से वेंटिलेटर पर पहुंची व्यवस्था
  3. आरटीआई के जरिए मांगी गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट

नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर। महत्वाकांक्षी चीता पुनर्स्थापना योजना के तहत मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए चीतों व शावकों के जीवित रहने की दर भले ही अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से संतोषजनक बताई जा रही हो, लेकिन चीतों की मौत पर सवाल उठ रहे हैं।

सोमवार को दम तोड़ने वाले गौरव चीता से पहले कई चीते ऐसे रहे, जिन्हें बीमार देखकर उपचार के लिए अस्पताल तो लाया गया पर उन्हें बचाया नहीं जा सका। इससे उपचार और निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में है।

कूनो प्रबंधन की ओर से कभी भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से मृत्यु का कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। यही कारण है कि वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने सूचना के अधिकार के तहत भी एक जनवरी 2024 से अब तक मृत चीतों से संबंधित पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी है, ताकि चीतों की मौत का सच सामने आ सके।


बता दें कि अब तक दक्षिण अफ्रीकी देशों से लाए गए 29 चीतों में से 10 चीतों की मौत हो चुकी है। वहीं यहां जन्म लेने वाले 53 शावकों में से 17 दम तोड़ चुके हैं। हालांकि चार साल पहले शुरू हुए चीता प्रोजेक्ट में विशेषज्ञों की आशंका के विपरीत यह स्थिति काफी बेहतर है। फिर भी बीमार चीतों के बारे में उनके अति गंभीर हो जाने पर ही पता चल पा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि समय रहते चीतों की बीमारी ट्रैक क्यों नहीं हो पा रही है, जिससे उन्हें उपचार कर बचाया जा सके।

कूनो प्रबंधन के अनुसार चीता गौरव भी 12 सिंतबर को निगरानी दल को बीमार नजर आया था। प्रबंधन ने ही माना है कि तब तक किडनी में परेशानी सहित अन्य वजहों से उसकी स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि डाक्टर चेकअप और जरूरी दवाएं देने के लिए उसे बार-बार बेहोश करने का जोखिम तक नहीं उठा सके।

कूनो में अब तक हुईं मौत

  • कूनो में सबसे पहले 26 मार्च 2023 को साशा चीता की मौत हुई थी, उसका कारण किडनी में इंफेक्शन बताया गया।
  • 23 अप्रैल 2023 को साउथ अफ्रीका से लाए गए नर चीते उदय की मौत का कारण कार्डियक आर्टरी फेल होना बताया गया था।
  • 9 मई 2023 को दक्षिण अफ्रीकी चीता दक्षा की मेटिंग के दौरान घायल होने के बाद मौत हो गई थी। 23 व 25 मई 2023 को ज्वाला चीता के तीन शावकों की मौत हो गई थी।
  • 11 जुलाई 2023 को चीता तेजस की आपसी संघर्ष में उसकी जान गई है। 14 जुलाई 2023 को चीते सूरज की गर्दन पर भी घाव मिला था। उसकी मौत भी संघर्ष में ही बताई गई।
  • 2 अगस्त 2023 को चीता धात्री का शव मिला था। इसकी मौत भी इंफ्क्शन बताया गया। 16 जनवरी 2024 को नर चीते शौर्य ने दम तोड़ा।
  • 5 अगस्त 2024 को मादा चीता गामिनी का शावक घिसटते हुए दिखा। रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के कारण उसकी मौत होना बताया गया।
  • 27 अगस्त 2024 को नर चीते पवन का शव नाले में मिला।
  • 28 नवंबर 2024 को चीता निर्वा से जन्मे 2 शावकों के शव क्षत-विक्षत हालत में मिले थे।
  • 01 जून 2026 को चीता केजीपी 11 ने मुरैना के जंगल में घायल मिलने के बाद दम तोड़ दिया था।
  • 12 मई 2026 को मादा चीता केजीपी 12 के चार शावक मांद के पास मृत मिले थे।

कूनो में चीते सहित अन्य वन्यजीवों के उपचार या निगरानी में कोई लापरवाही नहीं है, यही कारण है कि देश का चीता प्रोजेक्ट पूरी तरह से सफल है। गौरव चीते को डाक्टरों ने बचाने के खूब प्रयास किए, विदेश के चीता विशेषज्ञों से लगातार संपर्क में रहे। वन्यजीव संस्थान, देहरादून की भी सेवाएं नियमित ली जाती हैं। चीता के किडनी में कई सारे इशु थे, इसलिए उसे बचाया नहीं जा सका। पोस्टमार्टम को लेकर जो भी सवाल हैं, विभाग निर्धारित प्रारूप व मापदंड में उनके जवाब देगा। डॉ. समीता राजौरा, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ, मध्य प्रदेश।