प्रोजेक्ट चीता का नया चरण: अब लक्ष्य सिर्फ जीवित रखना नहीं, भारत में आत्मनिर्भर आबादी तैयार करना
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि भारत में जन्मी मादा चीता भी प्रजनन कर रही हैं। उनकी अगली पीढ़ियां भारतीय धरती पर जन्म ले रही हैं।
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 09:54:03 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 09:54:29 PM (IST)
कूनो नेशनल पार्क का फाइल फोटो।HighLights
- तीन संरक्षण स्थलों में 59 हुई चीतों की संख्या
- पांचवें साल में कूनो से आगे बढ़ा प्रोजेक्ट
- भारतीय धरती पर जन्मी मादा चीतों का सफल प्रजनन
नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर। देश में चीतों को फिर से बसाने की मुहिम अब एक नए दौर में पहुंच रही है। कभी अपने अस्तित्व और नए वातावरण में अनुकूलन के लिए इंसानी निगरानी पर निर्भर रहे चीते अब जंगल में शिकार करने, अपने इलाके स्थापित करने, समूह बनाने और प्राकृतिक रूप से प्रजनन करने लगे हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि भारत में जन्मी मादा चीता भी प्रजनन कर रही हैं। उनकी अगली पीढ़ियां भारतीय धरती पर जन्म ले रही हैं। यह बदलाव प्रोजेक्ट चीता की सफलता के साथ उसके सामने खड़ी अगली बड़ी चुनौती की ओर भी संकेत करता है। अब लक्ष्य केवल चीतों को जीवित रखना नहीं, बल्कि भारत में ऐसी आबादी तैयार करना है, जो प्राकृतिक रूप से अपना अस्तित्व बनाए रख सके।
प्रोजेक्ट चीता अपने पांचवें वर्ष में कर रहा है प्रवेश
प्रोजेक्ट चीता अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान से शुरू हुई इस मुहिम का दायरा अब गांधीसागर अभयारण्य और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वीडीटीआर) तक पहुंच चुका है। देश में चीतों की कुल संख्या 59 हो गई है, जिनमें 40 भारत में जन्मे चीते हैं। बढ़ती आबादी और भारतीय परिस्थितियों में चीतों के प्रजनन ने संरक्षण कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की नई संभावनाएं पैदा की हैं।