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पंचायत में बनी योजना, गूगल से ली मदद... फिर किले से चुराई 400 साल पुरानी तोप, राजस्थान से गिरफ्तार आरोपियों ने किया खुलासा

मध्य प्रदेश के नरवर किले से सिंधिया रियासत कालीन 400 साल पुरानी तोप राजस्थान के करौली जिले के एक गांव गांवड़ा के मीणा समाज के लोगों ने पड़ोसी गांव के ...और पढ़ें

By Devendra SamadhiyaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 26 Jul 2026 10:34:12 PM (IST)Updated Date: Mon, 27 Jul 2026 07:16:55 AM (IST)
पंचायत में बनी योजना, गूगल से ली मदद... फिर किले से चुराई 400 साल पुरानी तोप, राजस्थान से गिरफ्तार आरोपियों ने किया खुलासा
नरवर किले तोप चोरी मामले में बड़ा खुलासा।

HighLights

  1. नरवर किले तोप चोरी मामले में बड़ा खुलासा
  2. CCTV और मोबाइल लोकेशन से खुली पोल
  3. पिकअप में लादकर करौली ले गए थे तोप

नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी। मध्य प्रदेश के नरवर किले से सिंधिया रियासत कालीन 400 साल पुरानी तोप राजस्थान के करौली जिले के एक गांव गांवड़ा के मीणा समाज के लोगों ने पड़ोसी गांव के गुर्जर समाज के लोगों को डराने के लिए चुराई थी।

दरअसल, दोनों पक्षों में वहां के बांध के पानी को लेकर अरसे से तनातनी चली आ रही है। चूंकि इस बरसात में फिर पानी छोड़े जाने के दौरान मीणा पक्ष को विवाद की आशंका थी, इसलिए उन्होंने गुर्जर पक्ष को डराने के लिए कि वह बांध को तोप से उड़ा देंगे, इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे डाला। यह राजफाश शिवपुरी पुलिस ने घटना में शामिल रहे दो आरोपितों को करौली से गिरफ्तार करने के बाद किया है।


पूरे गांव ने मिलकर तोप चुराने की प्लानिंग की

पुलिस के अनुसार, तोप चोरी में शामिल रहे करौली जिले के सदर हिंडौन थाना क्षेत्र स्थित पालनपुर गांव निवासी अमन कुमार मीणा और गांवड़ा गांव निवासी टिम्मू राम मीणा को गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपितों ने बताया कि पूरे गांव ने मिलकर तोप चुराने की प्लानिंग की थी। तोप चुराने का फैसला भी पंचायत में संयुक्त रूप से लिया गया था।

नरवर थाना के प्रभारी विनय यादव के अनुसार, आरोपितों ने बताया कि गूगल पर सर्च किया कि देश के किस-किस किले पर तोपें रखी हैं। कई किलों को देखा और आखिर में नरवर किले की 14 तोपों में से सबसे छोटी पांच फीट दो इंच की यह तोप चोरी करने का निर्णय आम सहमति से लिया गया, क्योंकि यह तोप चलने लायक अवस्था में दिख रही थी और इसे ले जाना अन्य तोपों के मुकाबले आसान था।

तोप लेने किला तक पहुंचे थे 25 लोग

पुलिस के अनुसार, आरोपितों ने तोप ले जाने का रूट तय किया और इसके लिए सबसे पहले तीन जुलाई को तीन वाहनों में 25 लोग नरवर किला पहुंचे। उन्होंने तोप को उसके स्थान से हटा भी दिया था, लेकिन करीब साढ़े तीन टन वजन होने के कारण उसे उस दिन नहीं ले जा सके तो वे सब लौट गए।

इसके बाद पूरी तैयारी के साथ दोबारा 15-16 जुलाई की दरम्यानी रात नरवर किला पहुंचे। यहां तोप को किला से उतारने के बाद एक पिकअप पर लाद लिया और लंबा रूट तय करके करौली ले गए। वहां एक घर पर तोप को उतारकर रख लिया गया, ताकि उस पर किसी बाहरी की नजर न पड़ सके।

टोल और सीसीटीवी से खुला राज, तोप की बरामदगी बाकी

जिस दिन किले की रेकी हुई और जिस रात चोरी हुई, उन दोनों दिनों 15 से 20 संदिग्ध मोबाइल नंबरों की लोकेशन एक जैसी मिली। इसको आधार बनाकर शिवपुरी पुलिस राजस्थान के गांव गांवड़ा मीणा तक पहुंची। इसके साथ ही पुलिस ने टोल प्लाजा के सीसीटीवी खंगाले तो एक पिकअप बोलेरो आरजे-34 जीए 2980 का रूट मिला। इसी से तोप को ले जाया गया।

पुलिस ने अमन कुमार मीणा और टिम्मू राम मीणा के कब्जे से पिकअप वाहन को बरामद किया। हालांकि अभी तक पुलिस के हाथ तोप नहीं लगी है। पुलिस अब चोरी में शामिल रहे और तोप छुपाने वाले अन्य आरोपितों पर भी कार्रवाई करेगी।

पांचना डैम विवाद में उपयोग हुई तोप

जिस पांचना डैम के पानी को लेकर मीणा और गुर्जर समाज के लोगों के बीच विवाद बताया जा रहा है, वह करौली और सवाई माधोपुर के 35 गांवों के 9,985 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई के लिए बनाया गया था। डैम बनने से 39 गांवों की जमीन डूब क्षेत्र में आ गई। इस गांव में दो पक्ष आमने-सामने हैं और कुल 74 गांव इस विवाद में दो पक्षों में बंटे हैं।

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बताया जाता है कि वर्ष 2005-06 में गुर्जर आंदोलन के दौरान एक तोप चलाई गई थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। इसी दहशत को दोहराने के लिए मीणा समाज के आरोपियों ने नरवर किले से तोप चुराई।

जो आरोपित पकड़े गए हैं उन्होंने पूछताछ में बताया है कि और भी लोग थे जिनके पास तोप है। जिनके नाम बताए गए हैँ उनके मोबाइल फिलहाल बंद हैं। आरोपितों की तलाश की जा रही है। उम्मीद है तोप जल्द मिल जाएगी। प्रशांत शर्मा, एसडीओपी, करैरा

फैक्ट फाइल

  • 15-16 जुलाई की दरम्यानी रात चुराई गई थी नरवर किले से तोप।
  • किले की कचहरी में रखीं 14 तोपों में से अब रह गईं सिर्फ 13 तोप
  • सिंधिया राजवंश की 400 साल पुरानी और कचहरी की सबसे छोटी तोप थी।
  • आजादी के बाद पूरे भारत में तोप चोरी की एकमात्र पहली वारदात बताई जा रही है।