मनोज भार्गव, शिवपुरी। Chandra Shekhar Azad खनियांधाना को चंद्रशेखर आजाद की कर्मस्थली कहा जाता है। आजाद की कर्मस्थली को जो पहचान मिलनी चाहिए थी, वह पहचान अब तक नहीं मिल सकी है। सीतापाठा जहां चंद्रशेखर आजाद ने बम के परीक्षण किए थे। उसे भी पर्यटन के मानचित्र पर उकेरा नहीं गया है। खनियांधाना के लोगों का कहना है कि खनियाधाना के सीतापाठा को पर्यटन के मानचित्र पर उकेरा जाए, जिससे यह चंद्रशेखर आजाद की कर्मस्थली के रूप में देश भर में पहचान स्थापित कर सके।

खलकसिंह जूदेव के साथ आए थे आजाद: चंद्रशेखर आजाद खनियाधाना रियासत के महाराज खलकसिंह जूदेव के साथ झांसी से खनियाधाना आए थे। जूदेव की कार खराब हो गई थी और वह उसे सही कराने झांसी गए थे वहां एक मिस्त्री के यहां आजाद काम कर रहे थे और आजाद को कार छोड़ने के लिए जूदेव के साथ खनियाधाना भेजा जहां उन्होंने रास्ते में पिस्टल से सांप को मारकर जूदेव को बचाया था। इसके बाद जूदेव उन्हें खनियाधाना लेकर आए थे।

सीतापाठा की पहाड़ियों पर किया थे बम के परीक्षण: सीतापाठा की पहाड़ियों पर चंद्रशेखर आजाद ने बम के परीक्षण किए थे और बम के परीक्षण के निशान आज भी सीतापाठा की पहाड़ियों पर मौजूद हैं। इस स्थान को सहेजने के लिए न तो प्रशासन और न ही पर्यटन विभाग द्वारा संवारने की कोई कवायद नहीं की गई हैं। यहां के स्थानीय युवा ही चंद्रशेखर आजाद की कर्मस्थली सीतापाठा पर आयोजन करते हैं।

प्रतिमा लगाई बस स्टैंड पर: चंद्रशेखर आजाद की कर्मस्थली में चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा जरूर लगा दी गई है। खनियाधाना के बस स्टेंड पर यह प्रतिमा लगाई गई है। जयंती व अन्य दिनों में चंद्रशेखर को याद किया जाता है। जबकि कर्मस्थली को विकसित किया जाना चाहिए यह मांग कई बार खनियाधाना के लोग भी उठा चुके हैं।

फोटो भी बनाया था पेंटर मम्माजू ने

चंद्रशेखर आजाद को मूछों को तांव देता हुआ फोटो भी खनियाधाना में ही बनाया गया था। पेंटर मम्माजू के द्वारा यह फोटो बनाया गया था। यहां के लोगों का कहना है कि इस इलाके को विकसित किया जाए, जिससे चंद्रशेखर आजाद की यादों को सहेजा जा सके।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay