माधव नेशनल पार्क में वन्यजीवों पर मंडराया शिकारियों का खतरा, एक साल से लापता है बाघिन एमटी-1
शिवपुरी के जंगलों में तेंदुओं की संख्या 95 से अधिक है और बाघों का भी परिवार 11 बाघों तक पहुंच गया है। जिनमें चार शावक हैं।
Publish Date: Thu, 29 Oct 2026 02:09:41 PM (IST)Updated Date: Thu, 29 Oct 2026 02:10:15 PM (IST)
HighLights
- कूनो घटना के बाद बाघों की सुरक्षा पर चिंता
- एक साल से रहस्य बनी हुई है बाघिन की गुमशुदगी
- वन विभाग ने बढ़ाई जंगल में गश्त और निगरानी
नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी। माधव टाइगर रिजर्व में जिस तरह से बाघों का कुनबा बढ़ने की खुशी है उसी तरह जंगल में घात लगाए बैठे शिकारियों का डर भी बढ़ गया है। क्योंकि शिकारियों के टारगेट पर चीता, बाघ और तेंदुओं सहित अन्य वन्यजीव रहते हैं। हाल ही में कूनो नेशनल पार्क क्षेत्र में 19 माह के शावक चीता की गोली मारने से हुई मौत के बाद कूनो की सीमा से सटे माधव टाइगर रिजर्व के बाघों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। जब शिकारी कूनों के चीतों पर घात लगा सकते हैं तो बाघों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
शिवपुरी के जंगलों में तेंदुओं की संख्या 95 से अधिक है और बाघों का भी परिवार 11 बाघों तक पहुंच गया है। जिनमें चार शावक हैं। ऐसे में इन शिकारियों से वन्यजीवों को बचाना एक बड़ी चुनौती है।
खास बात यह है कि बीते करीब एक साल से माधव टाइगर रिजर्व की बाघिन एमटी-1 अभी तक लापता है। जिसका न कोई कालर आइडी सिग्नल मिल रहा है और न ही पार्क प्रबंधन के रडार पर ट्रैस हो पा रही है। हालांकि पार्क प्रबंधन बाघिन की खोज कर रहा है।
10 तेंदुओं की खाल मिली तब फेल गई थी सनसनी
वन और रिजर्व मेहकमे में तब सनसनी फेल गई थी जब जुलाई माह में आगरा वन प्रबंधन टीम ने 10 तेंदुओं की खाल के साथ चार शिकारियों को पकड़ा था। जिनमें एक शिकारी भोगीराम आदिवासी का कनेक्शन शिवपुरी से होना सामने आया था। हालांकि शिवपुरी के विभागीय अधिकारियों ने शिवपुरी से कोई कनेक्शन नहीं होने की बात कही थी।
माधव टाइगर रिजर्व में बाघों सहित अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पार्क प्रबंधन अपनी पैदल गश्त में और कसावट करने जा रहा है। जहां जंगल में घुसने वाले मुख्य रास्ते हैं वहां खुफिया तंत्र को और मजबूत करेगा। जिससे बाहरी लोगों के जंगल में प्रवेश होते ही तत्काल सूचना मिल सके। रिजर्व एरिया में लगे कैमरों से भी नजर रखी जा रही है।
खुले में आ जाते हैं बाघ इसलिए है डर
टाइगर रिजर्व में बाघों का परिवार कभी सड़क किनारे तो कहीं पहाड़ी क्षेत्र में देखने को मिलता है। तेंदुआ तो शहरी क्षेत्र तक दस्तक देते रहते हैं। ऐसे में शिकारियों का डर बना रहता है। यह शिकारी विस्फोटक तो कहीं जाल बिछाकर घात लगाते हैं। मध्य प्रदेश का नौवां टाइगर रिजर्व बनते ही एक तेंदुए के शिकार हो गया था। अप्रैल 2026 में शिवपुरी के ऐरावन गांव के पास सरवन नामक 50 वर्षीय आदिवासी व्यक्ति पर माधव टाइगर रिजर्व की मादा बाघिन 'एमटी-6' ने हमला कर दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। डोगरपुर गांव में भी बाघों ने कुछ लोगों को घायल किया था।
पार्क में बाघों सहित अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हम पैदल गश्त और मजबूत करेंगे। पहले से ही हमारी कड़ी सुरक्षा रहती है। अभी मैं विभागीय ट्रेनिंग के चलते बाहर आया हूं। - हरिओम, उप संचालक, टाइगर रिजर्व
वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर हम लगातार मानीटरिंग करते हैं। कोई किसी भी वन्यजीव को नुकसान नहीं पहुंचा पाए इसका पूरा ध्यान रखा जाता है। हमारी टीम जंगल के अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात रहती है। - सुधांशु यादव, डीएफओ, शिवपुरी।