रबी फसलों के लिए किसानों को मिलेगा भरपूर पानी, मड़ीखेड़ा 85 और मोहनी सागर 95 फीसदी भरे
शिवपुरी सहित ग्वालियर, दतिया और भिंड क्षेत्र तक के खेतों की इन बांधों से प्यास बुझती है।
Publish Date: Sun, 01 Nov 2026 02:34:22 PM (IST)Updated Date: Sun, 01 Nov 2026 02:34:42 PM (IST)
इस बारिश में भरा मड़ीखेड़ा बांध का फाइल फोटो।HighLights
- अंचल के खेतों को मिलेगा पर्याप्त पानी
- 4.47 लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य
- तालाबों और बांधों से किसानों को राहत
नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी। किसानों के खेत रबी सीजन के लिए तैयार हैं और अधिकतर किसानों की बुवाई भी शुरू हो गई है। नवंबर के पहले सप्ताह तक बुवाई पूरी हो जाएगी। क्योंकि अभी मौसम भी किसानों के अनुकूल बना हुआ है। रबी सीजन के लिए पानी का संकट इस बार नहीं रहेगा क्योंकि शिवपुरी सहित ग्वालियर, दतिया, भिंड तक के खेतों की प्यास बुझाने वाले मड़ीखेड़ा और मोहनी सागर बांध अभी फुल भरे हुए हैं।
कृषि विभाग ने 4 लाख 47 हजार हेक्टेयर में रखा है बुवाई का लक्ष्य
मड़ीखेड़ा 85 और मोहनी सोगर 95 फीसदी भरे हुए हैं। जरूरत के अनुसार किसानों के लिए पानी छोड़ा भी जा रहा है। इस बार रबी सीजन के लिए कृषि विभाग ने 4 लाख 47 हजार हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य रखा है। सबसे ज्यादा रकबा गेहूं, चना, सरसों का रखा गया है। बांधों के फुल भरे होने से किसान चिंतित नहीं है। क्योंकि आवश्यकता के अनुसार किसानों को बांधों का पानी आसानी से मिल सकेगा।
बदल रहा है मौसम
इधर, मौसम बदल रहा है और बीते दो दिन से बूंदाबांदी का दौर जारी है। मौसम विभाग ने 2 नवंबर तक मौसमी बदलाव होने की चेतावनी दी है। अगर बारिश होती है तो किसानों को रबी फसल के लिए तो फायदा होगा लेकिन जिन किसानों की फसलें कटकर खेतों में पड़ी हैं उनको नुकसान हो सकता है।
अक्टूबर में फुल भरा तो देता है तीन फसलों का साथ
खास बात यह है कि अक्टूबर में पूरा बांध भरे रहने की स्थिति रहती है तो धान के साथ गेहूं और एक आगामी फसल तक का साथ मड़ीखेड़ा देता है। अब रबी सीजन के लिए किसानों को बांध का पानी मिल रहा है। करीब 33 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। पहले इसकी मात्रा ज्यादा थी अब डिमांड कम होने से पानी कम कर दिया गया है। मड़ीखेड़ा, मोहनी सागर और फिर हरसी बांध चार जिलों के किसानों की लाइफ लाइन की तरह साबित होते हैं।
नगर कस्बों के बांधों से मिलेगी मदद
खरीफ फसल से चूकने वाले किसानों को चिंता है कि अब उसके लिए रबी सीजन की फसल बहुत जरूरी है। इस बार सब सही रहा तो अंचल के भरे जलाशय भी मददगार साबित होंगे। क्योंकि बैराड़, छर्च, झिरी सहित अन्य जगह जो पुराने तालाब बने हैँ उनसे क्षेत्रीय किसानों के खेतों को पानी मिलता है। यह लाभ मिल भी रहा है। जिलेभर में तालाबों की स्थिति पर नजर डालें तो एक सैकड़ा से ज्यादा छोटे बड़े तालाब हैं जो अभी 60 से 70 फीसदी तक भरे हुए हैं। यानी रबी सीजन के लिए किसानों को पानी की चिंता नहीं रहेगी।
मड़ीखेड़ा भरा होता है तो पानी की कमी महसूस नहीं होती। अक्टूबर में अगर अटल सागर फुल भरा है तो धान गेहूं के साथ एक सहयोगी फसल के लिए भी पानी दिया जा सकता है। अभी रबी सीजन के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। मड़ीखेड़ा 85 फीसदी भरा हुआ है। - नवीन शाक्य, ईई, अटल सागर बांध