पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का बड़ा बयान, बोले- 'ब्राह्मणों ने राज किया ही नहीं तो शोषण कहां से कर लिया'
पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरात्तम मिश्रा ने चिर-परिचित शायराना अंदाज में कहा कि, 'जुगनुओं ने शराब पी ली है, अब तो सूरज को गालियां देंगे'...।
Publish Date: Sun, 27 Sep 2026 07:59:25 PM (IST)Updated Date: Sun, 27 Sep 2026 08:00:08 PM (IST)
मीडिया से चर्चा करते पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा। नईदुनियाHighLights
- शायराना अंदाज में तंज
- जातियों में न बंटने की सलाह
- ब्राह्मण समाज पर बयान
नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी। भाजपा में ब्राह्मणों की भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं और शोषण के आरोपों का खंडन करते हुए पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरात्तम मिश्रा ने सवाल उठाते हुए कहा कि, ब्राह्मणों ने राज किया ही नहीं तो शोषण कहां से कर लिया। उन्होंने ब्राह्मण समाज को 'शासक नहीं, संस्कृति का वाहक' के तौर पर पेश किया।
'जुगनुओं ने शराब पी ली है, अब तो सूरज को गालियां देंगे'...
दरअसल, वे रविवार को शिवपुरी शहर में ब्राह्मण समाज के सम्मेलन में शामिल होने आए थे। इस दौरान उन्होंने आलोचना की वजह को सत्ता या इतिहास से नहीं, बल्कि ‘ईर्ष्या' से जोड़ा।
इसके लिए उन्होंने जुगनू और सांप की कहानी का सहारा लिया। इस कहानी के जरिए उनका सीधा संदेश था कि ब्राह्मणों पर हमला तर्क पर नहीं, उनकी सामाजिक-धार्मिक चमक से हो रही जलन पर आधारित है।
उन्होंने अपने चिर-परिचित शायराना अंदाज में कहा कि, 'जुगनुओं ने शराब पी ली है, अब तो सूरज को गालियां देंगे'...।
अंदर के बंटवारे पर भी चोट की
कार्यक्रम के बाद मीडिया उनसे पूछा कि आप ब्राह्मणों को जगा रहे हैं, भाजपा में ब्राह्मण राजनीति किस स्तर पर है। इस पर उन्होंने कहा कि 'सर्वोच्च स्तर पर है'। उन्होंने गुना-शिवपुरी में जमीन तलाशने के प्रयासों को भी सिरे से खारिज कर दिया। पूर्व गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने मंच से सिर्फ बाहर के विरोधियों को ही नहीं, अंदर के बंटवारे पर भी चोट की। उन्होंने मंच से सनाढ्य, भार्गव, कान्यकुब्ज में बंटे ब्राह्मणों को नसीहत देते हुए कहा कि अरे मत बंटो मेरे दोस्तों। मेरी मान भी जाओ मेरी जान। जहां हो वहां इकट्ठे हो जाओ, कोई आपके पासंग में नहीं आने वाला।
ब्राह्मण विश्वास का ब्रांड
साथ ही उन्होंने मंदिरों पर कब्जे और जातियों में बांटने के आरोपों को भी काउंटर करते हुए कहा कि, अगर मंदिरों पर कब्जा किया होता तो सबसे ज्यादा मंदिर परशुराम जी के होते, लेकिन सबसे कम मूर्तियां उन्हीं की हैं। अगर हमने बांटा है तो जाति प्रमाण पत्र लेने तहसील क्यों जा रहे हो, मंदिर क्यों नहीं आ रहे। अंत में उन्होंने ब्राह्मण को विश्वास का ब्रांड बताते हुए कहा कि, रावण को सीता हरण के लिए, कर्ण को शिक्षा के लिए और पांडवों को वनवास में छिपने के लिए ब्राह्मण वेश ही क्यों धारण करना पड़ा।