
नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी। एक ओर तो कलेक्टर ने जिले भर के सरपंच-पटवारी से लेकर आशा-आंगनवाड़ी तक को अवैध शराब की मुखबिरी की जिम्मेदारी दी है, वहीं दूसरी ओर पिछोर के ग्राम गूगरी की महिलाओं ने बता दिया कि असली कार्रवाई कागज से नहीं, हौसले से होती है।
घूंघट की आड़ में रहने वाली गांव की महिलाओं ने हाथों में तख्तियां और जुबां पर नारे लेकर पूरे गांव में शराबबंदी रैली निकाली। रैली सीधे उन दुकानों पर पहुंची, जहां कमीशन पर अवैध रूप से शराब बेची जा रही थी। महिलाओं को आते देख दुकानदार शटर गिराकर भाग खड़े हुए।
जब किसी ने नहीं सुनी, तो विरोध को धार देने के लिए कुछ महिलाएं गांव में लगे मोबाइल टावर पर चढ़ गईं। कुछ महिलाएं नीचे धरने पर बैठ गईं। टावर के ऊपर से ही चेतावनी गूंजी। गांव की महिला विनिता ने टावर से चिल्लाते हुए कहा - "अगर गांव में शराब बंद नहीं हुई तो हम यहीं से कूदकर मर जाएंगे।"
टावर के नीचे बैठी अन्य महिलाओं ने जो दर्द बताया, वह हर घर की कहानी है। महिलाओं का कहना था कि, "हमारे आदमी दिन भर मेहनत-मजदूरी करते हैं, शाम को जो 200-300 रुपये कमाकर लाते हैं, वो यहीं इन अवैध दुकानों पर उड़ा देते हैं। घर में बच्चों की फीस के लिए पैसे नहीं बचते, रोज दारू पीकर लड़ाई-झगड़ा करते हैं। इस नशे ने हमें कर्ज के दलदल में धकेल दिया है।"
सूचना मिलते ही पिछोर थाना प्रभारी नीतू सिंह मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बड़ी मशक्कत से समझाइश देकर महिलाओं को टावर से नीचे उतारा। महिलाओं के आंसू और आक्रोश देखकर टीआई नीतू सिंह ने उन्हें अपना निजी मोबाइल नंबर दिया और कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए कहा कि, "अब गांव में कहीं भी अवैध शराब बिके तो सीधे मुझे सूचना देना।"
इसके बाद थाना प्रभारी खुद महिलाओं के साथ उन चिन्हित दुकानों पर पहुंचीं, जहां अवैध शराब बेची जाती थी, लेकिन तब तक कमीशनखोरों ने अपना पूरा जखीरा वहां से हटा लिया था।