नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी। केंद्र सरकार की ड्रीम योजना के तहत चयनित शिवपुरी जिले के इकलौते पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय पनघटा की हकीकत ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। बाहर चमचमाता पीएमश्री का बोर्ड, अंदर खाली क्लास, सूखे नल, भूखे बच्चे और बेल्ट से पिटाई का खौफ। इसी बदहाली के खिलाफ आखिरकार अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा और मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में हंगामा किया।
अभिभावकों की मांग, सप्ताह में कराएं औचक निरीक्षण
अभिभावकों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि सात दिन के अंदर कलेक्टर स्वयं या किसी उच्च अधिकारी से विद्यालय का औचक निरीक्षण कराएं, दूषित पानी और भोजन की लैब जांच हो, खाली पदों पर शिक्षक भेजे जाएं और रैगिंग की घटना की निष्पक्ष जांच कर बच्चों को सुरक्षित माहौल दिया जाए। इस ज्ञापन की प्रतिलिपि नवोदय विद्यालय स्कूल मुख्यालय नोएडा और भोपाल संभाग के आयुक्त को भी भेजी गई है।
एक साल से हेडलेस स्कूल, 4 विषयों के शिक्षक नहीं
एनवीएस के नियम कहते हैं, प्राचार्य का पद 90 दिन से ज्यादा खाली नहीं रह सकता। हकीकत यह है कि, एक साल से पद खाली, स्कूल प्रभारी भरोसे। तेलगु, कंप्यूटर, गणित, अंग्रेजी के शिक्षक नदारद। पालक बोले, बच्चे राम भरोसे।
दूषित पानी से लीवर खराब, 20 बच्चे बीमार
आरओ, वाटरकूलर, हैंडपंप तीनों बंद। बच्चे दूषित पानी पीने को मजबूर, 20 से ज्यादा को लीवर-पेट में इंफेक्शन। एनवीएस मैनुअल में 6 माह में हेल्थ चेकअप और रोज डाक्टर-नर्स अनिवार्य, यहां सिर्फ एक नर्स, वो भी ड्यूटी टाइम तक। कक्षा 11 के विकास साहू के पिता संदीप साहू ने बताया कि, उनका बेटा 15-20 दिन बुखार में तड़पा फिर भी एक टेस्ट नहीं कराया। जब खड़ा नहीं हो पाया तब बुलाया, इसे ले जाओ। झांसी में लीवर इंफेक्शन निकला।
छात्रों को बेल्ट से की रैगिंग
15 सितंबर रात सीनियरों ने जूनियर्स को हास्टल में बुलाकर बेल्ट से पीटा। पालकों को 20 सितंबर को पता चला। सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन में रैगिंग पर एफआइआर और निष्कासन है। प्रबंधन ने कहा-15 दिन घर भेज दिया। न लिखित सूचना, न कार्रवाई। पीड़ित बच्चे डरे हुए, हास्टल में सीसीटीवी तक नहीं।
10 मिनट लेट तो दिन भर भूखा
अभिभावकों के अनुसार स्कूल की छुट्टी 1:30 बजे होती है। ड्रेस बदलकर मेस पहुंचने में 10 मिनट लेट होने पर खाना नहीं दिया जाता। बच्चा दिनभर भूखा रहता है, सीधा रात को खाना मिलता है।
चेयरमैन कलेक्टर, फिर भी निरीक्षण नहीं
अभिभावकों के अनुसार कलेक्टर स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन होते हैं, उन्हें साल में दो निरीक्षण करना अनिवार्य है। आरोप है कि, आज तक एक भी निरीक्षण नहीं किया गया, न ही पेरेंट्स मीटिंग बुलाई गई। उनका आरोप है कि, जनसुनवाई में एडीएम बोले-"मैं क्या वहां पोस्टिंग करवा दूं?"
शिकायत करो तो नंबर काटने की धमकी
पालकों द्वारा सौंपे गए हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन में सबसे खतरनाक बात लिखी है कि, कई बार मौखिक-लिखित शिकायत की, कोई सुनवाई नहीं। अगर बच्चा हिम्मत कर बोलता है तो उसे टार्चर किया जाता है, प्रैक्टिकल-प्रोजेक्ट के नंबर काटने और टीसी देने की धमकी दी जाती है।