
नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी: स्विटरलैंड के मार्टिन और जर्मनी की उलरिके रविवार की अंतत: विवाह बंधन में बंध गए। दोनों ने अपने आध्यात्म गुरु डा. रघुवीर सिंह गौर के सानिध्य में सात जन्मों और सात कसमों के साथ भारतीय रीति रिवाज से विवाह कर लिया। नईदुनिया से बात करते हुए बताया कि दोनों काफी खुश हैं कि उन्होंने सात जन्मों के बंधन में बांधने वाली भारतीय पद्धति से विवाह किया है, न कि पार्टनशिप मैरिज। बकौल मार्टिन यह उनके पूर्व जन्मों के संस्कार हैं कि उन्हें गुरुजी के आशीर्वाद से यह अवसर प्राप्त हुआ है।
उलरिके बातती हैं कि उन्होंने कई वैस्टर्न शादियां देखी हैं, परंतु भारत की बात ही अलग हैं। यहां शादी को एक पूजा की तरह पवित्र माना जाता है। भारत में शादी के एक आराधना है, जबकि विदेशों में ऐसा नहीं है। उनके अनुसार जब हम दोनों ने यह तय किया कि हम भारतीय पद्धति से शादी करेंगे तो अच्छा महसूस हुआ, लेकिन जब भारत आकर इतने दिन पहले से शादी की रस्में, पूजा पाठ, हल्दी, मेहंदी किया तो लगा कि भारत में जो है, वह पूरे विश्व में कहीं नहीं है। बकौल उलरिके उन्हें सब कुछ एक स्वप्न की तरह लग रहा है।
मार्टिन और उलरिके के अनुसार उन्हें भारत की शादी के सात फेरों, यहां की विवाह की कसमों और सात जन्मों तक एक-दूसरे के होने की बात पर पूरा भरोसा है। यहां शादियों जितना आध्यात्म है, उतना आध्यात्म वेस्टर्न मैरिज में नहीं है। यही वजह है कि हमने भारतीय पद्यति से शादी की है और हम धन्य हैं कि हमारी शादी गुरुपूर्णिमा के अवसर पर हुई है व हमें शादी के अवसर पर गुरुजी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है।