यूनेस्को के मानकों पर ओरछा: 3D लेजर स्कैनिंग और GIS मैपिंग से सहेजी जा रही बुंदेली विरासत, नए निर्माण पर लगी रोक
वर्ष 2019 में यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल होने के बाद ओरछा के विश्व धरोहर नामांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। विरासत की दृश्यता और मूल स्वरूप को ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 04:59:48 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 05:00:38 PM (IST)
HighLights
- 3D तकनीक से डिजिटल मैपिंग
- नो-कंस्ट्रक्शन जोन से रुकेगा अतिक्रमण
- चौथी यूनेस्को धरोहर बनने की ओर
मनीष असाटी, नईदुनिया, टीकमगढ़। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक नगरी ओरछा अब अपनी सदियों पुरानी विरासत को आधुनिक तकनीक से सहेज रही है। यूनेस्को विश्व धरोहर के लिए नामांकन की प्रक्रिया के तहत ओरछा के प्रमुख स्मारकों और उनके आसपास के क्षेत्र की 3डी लेजर स्कैनिंग, GIS और ड्रोन मैपिंग कर डिजिटल दस्तावेज तैयार किया गया है। श्रीरामराजा मंदिर से लेकर जहांगीर महल, चतुर्भुज मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर और बेतवा किनारे की छतरियों तक को इस डिजिटल सर्वे में शामिल किया गया है।
हेरिटेज कोर व बफर जोन चिह्नित, नए निर्माण पर रोक
वर्ष 2019 में यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल होने के बाद ओरछा के विश्व धरोहर नामांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। विरासत की दृश्यता और मूल स्वरूप को बनाए रखने के लिए हेरिटेज कोर जोन और बफर जोन चिह्नित किए गए हैं। इन क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण को रोकने के लिए प्रशासन ने विशेष सुरक्षा क्षेत्र भी तय किए हैं। जहांगीर महल, रामराजा मंदिर और कंचना घाट के आसपास करीब 100 से 300 मीटर के दायरे में नए निर्माण पर रोक लगाई गई है।
हर स्मारक का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
अत्याधुनिक सर्वे तकनीक से तैयार डिजिटल नक्शे में विरासत स्थलों की लोकेशन, संरचना और आसपास के क्षेत्र का विस्तृत रिकार्ड तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य भविष्य में होने वाले विकास कार्यों को इस तरह नियंत्रित करना है कि ऐतिहासिक स्मारकों की दृश्यता और मूल स्वरूप प्रभावित न हो। 3डी लेजर स्कैनिंग से स्मारकों की संरचना का डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जा सकता है, जबकि जीआइएस मैपिंग के माध्यम से विरासत क्षेत्र और उसके आसपास के भू-भाग की स्थिति को एक ही डिजिटल प्लेटफार्म पर देखा जा सकेगा। ड्रोन सर्वे से पूरे क्षेत्र का विस्तृत मैप तैयार किया गया है।
नो-कंस्ट्रक्शन जोन से नियंत्रित होगा विकास
ओरछा में विरासत स्थलों के आसपास अनियोजित निर्माण रोकना नामांकन प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। कोर और बफर जोन तय होने के बाद इन क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित किया जा रहा है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि पर्यटकों को स्मारकों का निर्बाध दृश्य मिले और आधुनिक निर्माण ऐतिहासिक परिदृश्य पर हावी न हो। इसके साथ ही कचरा प्रबंधन, व्यवस्थित पार्किंग, ईको-फ्रेंडली जोन और भीड़ नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं को भी बेहतर करने पर काम किया जा रहा है। पर्यटकों के लिए हेरिटेज वाक के मार्ग भी विकसित किए जा रहे हैं।
प्रदेश की चौथी विश्व धरोहर बनने की दिशा में ओरछा
कलेक्टर जमुना भिडे के अनुसार, यूनेस्को की प्रक्रिया में ओरछा का नामांकन स्वीकार होने पर यह खजुराहो, सांची और भीमबेटका के बाद मध्य प्रदेश का चौथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बन सकता है। विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से ओरछा की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होने के साथ पर्यटन गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर होटल, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प, गाइड और अन्य पर्यटन आधारित व्यवसायों के लिए अवसर बढ़ने की संभावना है।
निवाड़ी के अलग जिला बनने के बाद ओरछा से जुड़े प्रशासनिक कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था मजबूत हुई है। प्रशासन के सीधे नियंत्रण से स्वच्छता, पार्किंग, यातायात और पर्यटक सुविधाओं जैसी व्यवस्थाओं को विरासत संरक्षण के मानकों के अनुरूप विकसित करने में मदद मिल रही है।
अब ओरछा की ऐतिहासिक पहचान को डिजिटल दस्तावेजों में सुरक्षित करने के साथ उसके आसपास के विकास को नियंत्रित करने की कवायद पूरी हो चुकी है। नामांकन की प्रक्रिया में आगे की समीक्षा के बाद यूनेस्को के निर्णय पर इस ऐतिहासिक नगरी की विश्व धरोहर पहचान निर्भर करेगी।