बुंदेलखंड के 5 किलों का होगा कायाकल्प: हेरिटेज वॉक से लेकर लाइट एंड साउंड शो तक, पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
जिला प्रशासन ने इन किलों के वैज्ञानिक संरक्षण, बुनियादी सुविधाओं के विकास और पर्यटन सर्किट तैयार करने का प्रस्ताव मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग को भेजा है।...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 13 Oct 2026 08:30:11 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2026 08:30:44 PM (IST)
गर्भ गिरावन तोप के कारण ऐतिहासिक बल्देवगढ़ का ऐतिहासिक किला एवं पचेर घाट किले का नक्कासीदार गेट। नईदुनियाHighLights
- पर्यटन विभाग को सौंपे किले
- रोजगार और होम-स्टे को बढ़ावा
- स्थानीय संस्कृति को पहचान
मनीष असाटी, नईदुनिया, टीकमगढ़। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान दिलाने की तैयारी है। राजस्थान की तर्ज पर यहां के पांच ऐतिहासिक किलों को संरक्षित कर पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है।
जिला प्रशासन ने इन किलों के वैज्ञानिक संरक्षण, बुनियादी सुविधाओं के विकास और पर्यटन सर्किट तैयार करने का प्रस्ताव मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग को भेजा है। इनमें बल्देवगढ़ व मोहनगढ़ के किले पर्यटन विभाग को व अस्तौन का किला पुरातत्व विभाग को सौंपा भी जा चुका है। पचेर घाट के किले को पर्यटन विभाग को सौंपने की प्रक्रिया जारी है।
बुंदेली संस्कृति को बढ़ेगी पहचान
बता दें, राजस्थान में ऐतिहासिक किलों और हवेलियों को पर्यटन से जोड़कर रोजगार के अवसर विकसित किए गए हैं। इसी तर्ज पर इन किलों के संरक्षण के साथ यहां हेरिटेज वाक, लाइट एंड साउंड शो, बुंदेली व्यंजन केंद्र और स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए हाट बाजार विकसित करने की योजना है।
इससे बुंदेली संस्कृति को पहचान बढ़ेगी। स्थानीय गाइड, लोक कलाकार, हस्तशिल्प कारीगर और छोटे कारोबारियों को लाभ मिल सकता है। पर्यटकों के बढ़ने से होम-स्टे, स्थानीय खानपान और पारंपरिक उत्पादों की बिक्री के अवसर भी बढ़ेंगे।
ऐतिहासिक रामगढ़ का किला। नईदुनिया
ये हैं विशेषताएं
बल्देवगढ़ का किला विशाल किलेबंदी और अत्यधिक तेज आवाज वाली तोप के लिए प्रसिद्ध है। मोहनगढ़ का किला तालाब के बीच स्थित है। चंद्रपुरा का किला प्राचीन बावड़ी और ग्रामीण विरासत के लिहाज से महत्वपूर्ण है। धसान नदी के किनारे स्थित पचेर घाट के किले का सामरिक महत्व रहा है। अस्तौन का किला तात्या टोपे से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों के कारण महत्वपूर्ण है।
ऐतिहासिक संपदाओं को खंडहर होने से बचाने के साथ स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना प्राथमिकता है। इससे ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खुल सकेंगे। -विवेक श्रोत्रिय, कलेक्टर, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश