ओरछा में अनोखा दशहरा: राजा रामराजा सरकार करेंगे विजय प्रस्थान, हाथ में तलवार और ढाल के साथ देंगे योद्धा के रूप में दर्शन
गर्भगृह में केवल मुख्य पुजारियों द्वारा गुप्त अनुष्ठान और विशेष शस्त्र पूजा की जाएगी। इसके उपरांत दोपहर 12 बजे सरकार का दरबार आम जनता के लिए खोला जाएग...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 09:06:53 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 09:07:34 PM (IST)
ओरछा मंदिर का मुख्य द्वार। सोशल मीडियाHighLights
- दोपहर 12 बजे खुलेंगे मंदिर के कपाट
- राजसी परंपरा का विशेष पान और इत्र प्रसाद
- 400 साल पुरानी जीवंत राजकीय परंपरा
नईदुनिया प्रतिनिधि, टीकमगढ़ (ओरछा)। बुंदेलखंड की अयोध्या कही जाने वाली ओरछा नगरी में दशहरा राजसी अंदाज में मनाया जाएगा। यह पारंपरिक रूप से केवल धार्मिक पूजा का दिन न होकर बल्कि इस रियासत के एकमात्र, वैध और साक्षात जीवित शासक 'श्री रामराजा सरकार' के भव्य विजय अभियान, शस्त्र पूजा और विजय प्रस्थान की 400 साल पुरानी जीवंत राजकीय परंपरा का गवाह के रूप में दिखेगा। मंदिर में आम दिनों की तरह सुबह आठ बजे कपाट नहीं खोले जाएंगे। पहले प्रभु राम रावण का संहार करने के लिए योद्धा के स्वरूप में तैयार होंगे।
गर्भगृह में केवल मुख्य पुजारी करेंगे पूजा
गर्भगृह में केवल मुख्य पुजारियों द्वारा गुप्त अनुष्ठान और विशेष शस्त्र पूजा की जाएगी। इसके उपरांत दोपहर 12 बजे सरकार का दरबार आम जनता के लिए खोला जाएगा, ताकि श्रद्धालु अपने राजा की विजय यात्रा का दर्शन कर सकें।
श्रद्धालुओं को राजसी परंपरा की मिलेगी प्रसादी
मुख्य पुजारी पं. रमा महाराज ने बताया कि श्रद्धालुओं को साधारण मिष्ठान के बजाय राजसी परंपरा के अनुसार विशेष पान का बीड़ा, इत्र और इत्र की खाड़ी का प्रसाद बांटा जाएगा। यह प्रसाद प्राचीन सैन्य परंपरा का प्रतीक है, जब बुंदेला राजा युद्ध यात्रा, किसी बड़े सैन्य अभियान या दशहरे के दिन सीमा पार विजय यात्रा पर निकलते थे, तो महल से विदा होने से पहले राजमाता या पटरानी उन्हें अपने हाथों से राजसी पान का बीड़ा खिलाती थीं और उन पर सुगंधित इत्र छिड़कती थीं।
कौमी एकता की मिसाल पेश करते इस दरबार में प्रभु के जरीदार वस्त्र और मुकुट आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानीय मुस्लिम कारीगरों द्वारा तैयार किए जाते हैं। भगवान के राजसी स्वरूप के अनुरूप धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। प्रचलित मान्यता के अनुसार दरबार में वह प्रजा को दर्शन देकर विजय यात्रा के लिए आगे बढ़ते हैं।
योद्धा स्वरूप: दाहिने हाथ में चमचमाती तलवार और बाएं हाथ में ढाल
आम दिनों में ओरछा के गर्भगृह में प्रभु श्री राम अत्यंत शांत, सौम्य और बाल रूप में दर्शन देते हैं। उनके इस रूप को देखकर भक्तों के मन में वात्सल्य और भक्ति का भाव जागृत होता है लेकिन दशहरे के दिन स्वरूप एक प्रतापी योद्धा और चक्रवर्ती सम्राट के रूप में बदल जाता है। प्रभु के विग्रह को विशेष राजसी और युद्ध पोशाक पहनाई जाती है। उनके दाहिने हाथ में सोने-चांदी से जड़ित चमचमाती असली तलवार सौंपी जाती है और बाएं हाथ में ढाल सजाई जाती है।
यह स्वरूप इस बात का प्रतीक है कि एक आदर्श राजा केवल सिंहासन पर बैठने के लिए नहीं होता, बल्कि वह अपनी प्रजा की रक्षा, सामाजिक न्याय की स्थापना और दुष्टों के संहार के लिए सदैव शस्त्र धारण किए रहता है।