स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य होगा शुरू
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टीकमगढ़ (नईदुनिया प्रतिनिधि)।
शहर और नगरों में ही अभी तक घर-घर से कचरा उठाने का कार्य किया जाता रहा, लेकिन अब गांवों में भी यह व्यवस्था शुरू होने जा रही है। ग्राम पंचायतों द्वारा वाहनों को तैयार कराकर गांवों में भेजा जाएगा और घर-घर से शहरों की तरह ही यह कचरा गाड़ी कचरे को एकत्रित करेगी। इसके लिए केंद्र और मप्र सरकार ने बजट भी आवंटित कर दिया है। टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले के 113 गांवों में प्रायोगिक तौर पर यह कार्य शुरू हो रहा है। इसके सफल होने के बाद सभी गांवों में यह प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
गौरतलब है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य किया जाएगा। इसमें पृथ्वीपुर, टीकमगढ़, जतारा, पलेरा और निवाड़ी जनपद पंचायतों के 133 गांवों में घर-घर कचरा उठाने का कार्य किया जाएगा। पंचायत द्वारा कचरा गाड़ी ली जाएगी। स्वच्छ भारत मिशन पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिले में 133 तीन हजार से ज्याादा जनसंख्या वाले गांव का चयन किया गया है। वैसे तो सभी ग्राम पंचायतों में यह कार्य किया जाएगा। जिपं सीईओ सुदेश मालवीय ने कहा कि गांव-गांव को साफ सुथरा करने की योजना बनाई गई है। गांवों में यह सफलता प्राप्त करने के बाद ब्लॉक स्तर पर प्लास्टिक प्रबंधन को लेकर एक कचरा प्रसंस्करण बनाया जाएगा। इसमें आय के स्त्रोत भी देखे जाएंगे, ताकि पंचायतों को आय भी हो सके। कचरे को अलग-अलग गांव स्तर पर ही किया जाएगा। बाद में यह कचरा खाद के रूप में प्रयोग होने वाला खाद के रूप में प्रयोग होगा।
नगर की तरह गांव होंगे साफ सुथरे
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत नगर निकाय में चलने वाले साफ सफाई का नियमित कार्यक्रम अब गांव में भी अभियान की तरह शुरू होगा। ठोस, गीले कचरे का आधुनिक तकनीक से निस्तारण होने से गांव साफ-सुथरा होगा और ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार होगा। जिनकी डीपीआर बनाकर अनुमोदन होने पर मिशन के तहत ओडीएफ प्लस अभियान शुरू किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत पंचायत समिति भी इसमें निर्धारित की गई है। ग्राम स्तरीय कार्ययोजना समिति में 133 गांवों में कुल 436 सदस्य हैं। इसमें अधिकारियों, सचिव, सरपंच और ग्रामीण शामिल हैं।
गांव-गांव पहुंचकर ले रहे जानकारियां
कचरा एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के तहत 113 गांवों में यह कार्य शुरू होना है। इसके पहले गांवों में अब स्वच्छता ग्राही पहुंच रहे हैं। गांव के लोगों को कचरा गाड़ी को लेकर जानकारियां दी जा रही हैं। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है किस गांव में कितना कचरा एकत्र होता है। गीले और सूखे कचरे को लेकर बताया जा रहा है। सफलता मिलने के बाद यह पूरे जिलेभर में लागू किया जाएगा।
यह होंगे कार्य
गांव का ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन की गतिविधियों का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया गया है। इसमें ग्राम पंचायत में ठोस एवं तरल कचरा की मात्रा व प्रकार का आंकलन सम्मलित किया गया है। इसके तहत गांव में किन-किन किन स्थानों पर सोक पिट, मैजिक पिट, लीज पिट, सोक वे चेनल, नालियों की सफाई, मरम्मत व निर्माण किया जाना है, उसका विवरण अंकित किया गया है। किस प्रकार ठोस कचरे के निस्तारण के लिए किन किन स्थानों पर और किस क्षमता का कंपोस्टिंग पिट व इकाइयां एवं रिसोर्स रिकवरी सेंटर तैयार की जानी है, उसका विवरण भी सम्मलित किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत सूखा गीला कचरा प्रबंधन के लिए ब्लॉक स्तर के गांव का चयन किया गया है। गांव को स्वच्छ भारत के रूप में विकसित करने के लिए ठोस कचरा प्रबंधन के तहत अलग-अलग प्रकार के कार्य किए जाएंगे। ठोस कचरा प्रबंधन से सम्बंधित कार्य में श्रमिक लगाकर, गाड़ी से कचरा उठाव एवं डंपिंग यार्ड तक पहुंचाना है। वहीं तरल कचरा प्रबंधन से संबंधित कार्य मे नाली निर्माण, सोख्ता गढ्ढा आदि का निर्माण होंगे।
फैक्ट फाइल
जनपद पंचायत- चयनित गांवों की संख्या
जतारा- 25
पलेरा- 19
टीकमगढ़- 18
बल्देवगढ़- 21
पृथ्वीपुर- 12
निवाड़ी- 18
वर्जन
कोई भी कचरा चाहे वह गंदा पानी हो या ठोस अपशिष्ट, उसे चार चरणों में देखना होगा। अगर चार चरण पूरे हो रहे हैं, तो ही अपशिष्ट प्रबंधन पूर्ण माना जाएगा। उन्होंने कहा कि कचरा कहां से उत्पन्ना हो रहा है, कचरे को ले जाकर इक्ट्टा करने की व्यवस्था, कचरे को अंतिम रूप से एकत्र किया गया। साथ ही कचरे को एकत्र कर उसका उपचार और निष्पादन कर अंतिम डिस्पोजल किया गया है।
- सुदेश कुमार मालवीय, सीईओ जिपं टीकमगढ़