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ओरछा के जहांगीर महल का बदलेगा नाम? CM मोहन यादव बोले- जहांगीर कभी आया ही नहीं तो इसे वीर सिंह महल कहा जाए

निवाड़ी की कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को नई दिल्ली से वर्चुअल संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने ओरछा स्थित सुप्रसिद्ध जहांगीर महल...और पढ़ें

By Manish AsatiEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 09 Sep 2026 10:14:27 PM (IST)Updated Date: Wed, 09 Sep 2026 10:14:26 PM (IST)
ओरछा के जहांगीर महल का बदलेगा नाम? CM मोहन यादव बोले- जहांगीर कभी आया ही नहीं तो इसे वीर सिंह महल कहा जाए
ओरछा का जहांगीर महल

नईदुनिया प्रतिनिधि, टीकमगढ़। पर्यटन नगरी ओरछा की ऐतिहासिक धरोहरों और उनके नामकरण को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा बयान देकर नई चर्चा छेड़ दी है। बुधवार को निवाड़ी की कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को नई दिल्ली से वर्चुअल संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने ओरछा स्थित सुप्रसिद्ध जहांगीर महल के नाम पर ही सीधा सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब मुगल शासक जहांगीर कभी ओरछा आया ही नहीं, तो इस भव्य इमारत को जहांगीर महल कैसे कहा जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने मंच से स्पष्ट आह्वान किया कि बुंदेली माटी की इस ऐतिहासिक धरोहर को अब वीर सिंह महल के नाम से ही पहचाना जाना चाहिए। दरअसल, ओरछा महाराजा वीर सिंह देव बुंदेला की ऐतिहासिक कर्मभूमि रही है और स्थानीय स्तर पर लंबे समय से मुगलकालीन संदर्भों को लेकर ऐतिहासिक तथ्यों की समीक्षा की मांग उठती रही है।


मुख्यमंत्री ने इसी जनभावना को केंद्र में रखते हुए कहा कि बुंदेलखंड का इतिहास अपने पराक्रमी राजाओं की अमर गाथाओं से सजा हुआ है। ऐसे में जिस शासक का इस पावन धरती से कोई प्रत्यक्ष नाता ही नहीं रहा, उसके नाम से किसी महल की पहचान का औचित्य नहीं बनता। उनके इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में इतिहास और धरोहरों के पुनर्मूल्यांकन को लेकर नई बहस तेज हो गई है।

शून्य प्रतिशत ब्याज ऋण भुगतान की समय-सीमा अब 1 वर्ष

नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े मुख्यमंत्री ने निवाड़ी जिले के किसानों को सौगातों की बौछार करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। उन्होंने अन्नदाताओं के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए घोषणा की कि शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर मिलने वाले खरीफ और रबी फसलों के ऋण को चुकाने की सीमा को अब छह-छह माह से बढ़ाकर पूरा एक वर्ष कर दिया गया है।

इस व्यवस्था से किसानों को बार-बार बैंक के चक्कर लगाने और कागजी प्रक्रियाओं में उलझने से मुक्ति मिलेगी। वे अब ऋण लेने की तिथि से एक वर्ष के भीतर अपनी सुविधा अनुसार किस्तों का भुगतान कर सकेंगे।

प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि पद्धतियों पर दिया जोर

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कृषि को केवल जीविकोपार्जन का जरिया न मानकर इसे फायदे का व्यवसाय बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ और हर नागरिक की समृद्धि की गारंटी बनने जा रहा है।

सीएम ने किसानों से पारंपरिक खेती के ढर्रे से बाहर निकलकर दुग्ध उत्पादन, श्रीअन्न, उद्यानिकी, मत्स्य पालन और प्राकृतिक खेती जैसी आधुनिक पद्धतियों से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार खेतों से लेकर फैक्ट्रियों तक हर कदम पर किसानों के साथ मुस्तैदी से खड़ी है।

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मेधावी बेटियों और माटी के सपूतों को मिला मंच से सम्मान

महोत्सव के दौरान कृषि क्षेत्र में नवाचार करने वाले स्थानीय कृषकों और शिक्षा के क्षेत्र में जिले का नाम रोशन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं का अभिनंदन किया गया। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय निवाड़ी की प्रतिभाशाली छात्रा शिवानी कुशवाहा को कक्षा दसवीं की राज्यस्तरीय प्रवीण सूची में नौवां स्थान हासिल करने पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने वाले देवेंद्रपुरा के उदयभान कुशवाहा को संरक्षित खेती, पठाराम के सतीश बंशकार को औषधीय खेती, तरीचर कलां के सुरेश कुमार साहू को निजी कस्टम हायरिंग सेंटर संचालन और मड़िया खास के कुलदीप सिंह दांगी को ई-कृषि यंत्र अनुदान के सफल क्रियान्वयन के लिए सम्मानित किया गया।

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पशुपालन एवं सह-गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए टीला निवासी अरविंद घोष को डेयरी प्लस, सुजानपुरा के सुरेंद्र कुमार यादव को गौ-मैत्री योजना, चचावली के लालाराम सूत्रकार को प्राकृतिक खेती तथा थौना के कैलाश नारायण केवट को मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए मंच से प्रशस्ति पत्र देकर नवाजा गया।