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नईदुनिया प्रतिनिधि, टीकमगढ़। शहर के सबसे व्यस्ततम मार्ग सिविल लाइन रोड पर नगर पालिका द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद उपजा विवाद अब दुकानदारों के पक्ष में सुलझता नजर आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के कड़े हस्तक्षेप और भाजपा पार्षदों के विरोध के बाद प्रशासन ने जब्त किया गया सामान दुकानदारों को वापस लौटाने का निर्णय लिया है। एसडीएम संस्कृति लिटोरिया ने नगर पालिका सीएमओ को इस संबंध में विधिवत निर्देश जारी कर दिए हैं।
मामले को लेकर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि नगर पालिका परिषद की बैठक में यह तय हुआ था कि अतिक्रमण हटाने से पहले फुटपाथ दुकानदारों के लिए वैकल्पिक स्थान सुरक्षित किया जाएगा, लेकिन प्रशासन ने बिना किसी ठोस व्यवस्था के गरीबों के चूल्हे बुझा दिए।
उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि कभी शेरों की बलि नहीं चढ़ाई जाती, न ही गीदड़ और भेड़ियों की बलि चढ़ती है। हमेशा असहाय बकरे की ही बलि चढ़ाई जाती है। उमा भारती ने आरोप लगाया कि शहर के बड़े रसूखदारों और करोड़पतियों के अतिक्रमण पर अधिकारी मौन हैं, जबकि मेहनत-मजदूरी करने वाले छोटे दुकानदारों के ठेले तोड़कर उन्हें बेरोजगार कर दिया गया।
पूर्व सीएम उमा भारती के निर्देश के बाद भाजपा पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल एसडीएम कार्यालय पहुंचा। पार्षदों ने एसडीएम संस्कृति लिटोरिया को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि गरीब दुकानदारों का जब्त सामान और ठेले तुरंत वापस किए जाएं। इस पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम ने मौके पर ही नगर पालिका सीएमओ ओमपाल सिंह भदौरिया को सामान वापसी की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
पार्षदों ने नगर पालिका प्रशासन को भी पत्र सौंपकर चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसी किसी भी कार्रवाई से पहले दुकानदारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। इस फैसले से उन दर्जनों छोटे व्यापारियों को राहत मिली है, जिनका सामान पिछले कई दिनों से नगर पालिका के कब्जे में था। प्रशासन के इस कदम को उमा भारती की सक्रियता और जनविरोध की बड़ी जीत माना जा रहा है।
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