ओरछा के जहांगीर महल का नाम बदलकर 'वीर सिंह महल' करने की तैयारी, प्रशासन ने शुरू की प्रस्ताव बनाने की कवायद
ओरछा जहांगीर महल न्यूज: पुरातत्व विभाग जहांगीर महल के निर्माण, उसके ऐतिहासिक नाम और तत्कालीन परिस्थितियों से जुड़े प्राचीन अभिलेखों व साक्ष्यों का परी...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 14 Sep 2026 04:34:37 PM (IST)Updated Date: Mon, 14 Sep 2026 04:35:14 PM (IST)
जहांगीर महल का फाइल फोटो।HighLights
- सीएम मोहन यादव ने दिए थे नाम बदलने के संकेत
- पुरातत्व विभाग खंगाल रहा ऐतिहासिक साक्ष्य और दस्तावेज
- महाराजा वीर सिंह देव ने 17वीं सदी में कराया था निर्माण
मनीष असाटी, नईदुनिया, टीकमगढ़। पर्यटन नगरी ओरछा की ऐतिहासिक पहचान जहांगीर महल के नाम को लेकर अब बदलाव की प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछले दिनों कार्यसमिति की बैठक के दौरान ओरछा में महल के निरीक्षण के समय इसका नाम बुंदेला शासक महाराजा वीर सिंह देव के नाम पर वीर सिंह महल किए जाने के संकेत दिए थे। इसके बाद निवाड़ी जिला प्रशासन ने इस दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासन ने नामकरण से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
अब पुरातत्व विभाग महल के निर्माण, उसके ऐतिहासिक नाम और तत्कालीन परिस्थितियों से जुड़े प्राचीन अभिलेखों व साक्ष्यों का परीक्षण कर रहा है। इनकी समीक्षा के बाद अंतिम प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
महल में 136 कोठरियां, अलंकृत मेहराब, जालियां और विशाल गज द्वार
बेतवा नदी के किनारे स्थित जहांगीर महल ओरछा की सबसे प्रमुख स्थापत्य धरोहरों में शामिल है। तीन मंजिला इस महल का निर्माण महाराजा वीर सिंह देव के शासनकाल में विक्रम संवत 1662 से 1684 (ईस्वी सन् 1605 से 1627) के बीच कराया गया था। महल में 136 कोठरियां, अलंकृत मेहराब, जालियां और विशाल गज द्वार हैं। इसकी स्थापत्य शैली में बुंदेली और मुगल शैली का प्रभाव दिखाई देता है।
निर्माण वीर सिंह देव ने कराया, नाम जहांगीर से जुड़ा
महल के नाम को लेकर अब मूल सवाल इसके निर्माणकर्ता और वर्तमान पहचान से जुड़ गया है। प्रशासनिक स्तर पर यह देखा जा रहा है कि ऐतिहासिक अभिलेखों में महल के निर्माण, नामकरण और तत्कालीन उपयोग का उल्लेख किस स्वरूप में मिलता है। इसी आधार पर नाम परिवर्तन का प्रस्ताव आगे बढ़ाया जाएगा।
बुंदेलखंड के इतिहासकारों के अनुसार, महल की स्थापत्य विशेषताएं बुंदेला शासक वीर सिंह देव के दौर की कारीगरी और वास्तु दृष्टि को सामने लाती हैं। उनके अनुसार, यदि नाम में बदलाव किया जाता है तो इसके साथ महल से जुड़े प्रमाणिक ऐतिहासिक तथ्यों को भी व्यापक स्तर पर सामने लाना जरूरी होगा। इससे वीर सिंह देव के योगदान को नई पहचान मिल सकती है।
मुख्यमंत्री के संकेत के अनुपालन में पुरातत्व विभाग को प्राचीन अभिलेखों और ऐतिहासिक साक्ष्यों का गहन अवलोकन करने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल प्रासंगिक प्रमाणिक दस्तावेजों का संकलन किया जा रहा है। इनका अध्ययन और पुरातात्विक समीक्षा पूरी होने के बाद शासन स्तर पर अंतिम प्रस्ताव भेजा जाएगा। - जमुना भिड़े, कलेक्टर, निवाड़ी (मध्य प्रदेश)