रामराजा सरकार मंदिर में अब दानदाता न मिलने पर भी नहीं रुकेगी रसोई, प्रशासनिक बजट से बटेगा महाप्रसाद
नई व्यवस्था के अंतर्गत यदि किसी दिन भगवान के बालभोग या ब्यारीभोग के लिए कोई दानदाता आगे नहीं आता है, तो भी महाप्रसाद का वितरण निर्बाध रूप से जारी रहेग...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 11 Sep 2026 06:33:24 PM (IST)Updated Date: Fri, 11 Sep 2026 06:34:02 PM (IST)
श्री रामराजा सरकार मंदिर का फाइल फोटो।HighLights
- मंदिर फंड से उठेगा रोजाना 13,500 रुपये का खर्च
- डेढ़ क्विंटल खिचड़ी और ब्यारी में बनेगी पूड़ी-सब्जी
- सामान्य दिनों में भी निर्बाध रूप से जारी रहेगा लंगर
मनीष असाटी, नईदुनिया, टीकमगढ़। बुंदेलखंड की पावन धरा ओरछा में स्थित प्रसिद्ध श्री रामराजा सरकार मंदिर की रसोई अब किसी भी दिन सूनी नहीं रहेगी। श्रद्धालुओं की आस्था और जरूरतमंदों की तृप्ति के लिए मंदिर प्रशासन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। नई व्यवस्था के अंतर्गत यदि किसी दिन भगवान के बालभोग या ब्यारीभोग के लिए कोई दानदाता आगे नहीं आता है, तो भी महाप्रसाद का वितरण निर्बाध रूप से जारी रहेगा। इस पूरे वित्तीय व्यय की कमान खुद मंदिर प्रशासन अपने बजट से संभालेगा।
प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं को मिलेगी महाप्रसादी
दरअसल, कोरोना महामारी के दौर के बाद से मंदिर में दैनिक महाप्रसाद वितरण की स्थापित परंपरा आंशिक रूप से प्रभावित हुई थी। हालांकि विशेष अवसरों और सप्ताहांत पर दानदाताओं की कोई कमी नहीं रहती थी, लेकिन सामान्य दिनों में दानदाता न मिलने की वजह से बड़े पैमाने पर प्रसाद बांटने की कड़ी टूट जाती थी। नियमित दर्शनार्थियों और स्थानीय साधु-संतों द्वारा लंबे समय से इसे पुनर्जीवित करने की मांग की जा रही थी।
इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए निवाड़ी कलेक्टर एवं मंदिर प्रबंधक जमुना भिड़े ने दानदाताओं पर से मंदिर की निर्भरता को पूरी तरह समाप्त कर दिया। अब दान मिले या न मिले, रामराजा की रसोई का चूल्हा उतनी ही शिद्दत से जलेगा और प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं को महाप्रसाद से तृप्त करेगा।
बालभोग की परंपरा और सुबह का महाप्रसाद
- रामराजा सरकार के दरबार में प्रातः काल पहली आरती के साथ ही बालभोग अर्पण करने का नियम है। इसमें प्रतिदिन लगभग एक से डेढ़ क्विंटल शुद्ध दाल-चावल की स्वादिष्ट खिचड़ी तैयार की जाती है। भगवान को भोग समर्पित करने के उपरांत यह खिचड़ी मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं, साधुओं और भिक्षुओं में वितरित की जाती है।
इस व्यवस्था के लिए प्रति रसीद दान राशि 3500 रुपये निर्धारित है। दानदाता न होने की दशा में प्रशासन प्रतिदिन यह राशि स्वयं वहन कर प्रसाद का वितरण करेगा। संध्या कालीन व्यवस्था में ब्यारी प्रसाद के तहत 40 किलोग्राम गेहूं के आटे की पूड़ी और उतनी ही मात्रा में स्वादिष्ट सब्जी तैयार की जाती है।
इसकी निर्धारित दान राशि 10 हजार रुपये है, जिसे अब दानदाता की अनुपस्थिति में प्रशासन अपने कोष से भरेगा। इसके अलावा शयन आरती के समय दूध-पूड़ी का विशुद्ध भोग लगाया जाता है जिसे 'दूध ब्यारी' कहा जाता है। परंपरा के अनुसार दूध ब्यारी का प्रसाद जनसाधारण में बांटा नहीं जाता, बल्कि यह केवल प्रभु सेवा तक सीमित रहता है। राजभोग की भव्यता और प्रशासनिक गणित
दोपहर के समय लगने वाले राजभोग में आठ प्रकार के विशिष्ट व्यंजन पूड़ी, दो प्रकार की सब्जियां, रायता, खीर, हलवा, लड्डू, पपड़ी और पान अर्पित किए जाते हैं। 700 रुपये की रसीद पर 30 से 40 श्रद्धालु इसमें सम्मिलित हो सकते हैं। एसडीएम अशोक सेन के अनुसार अवकाश के दिनों में एक-एक दिन में चार-चार दानदाता मिल जाते हैं, परंतु महीने के 50 प्रतिशत सामान्य दिनों में दानदाता नहीं मिलते थे। अब मंदिर प्रशासन प्रतिदिन लगभग 13 हजार 500 रुपये का संभावित खर्च वहन कर आस्था को सामाजिक सरोकार से जोड़े रखेगा।
रामराजा सरकार मंदिर में दैनिक महाप्रसाद वितरण के लिए दानदाता नहीं मिलने पर मंदिर प्रशासन खर्चों का वहन कर व्यवस्था सुचारू रखी जाएगी। - अशोक सेन, एसडीएम, निवाड़ी