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जल संरक्षण और महिला उद्यमिता से खेती को मिला नया आधार, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में टीकमगढ़ सम्मानित

टीकमगढ़ जिले में इस योजना के तहत कृषि उत्पादन बढ़ाने, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और किसानों की आय के वैकल्पिक साधन विकसित करने के लिए कई नवाचार किए गए...और पढ़ें

By Manish AsatiEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Fri, 16 Oct 2026 07:21:04 PM (IST)Updated Date: Fri, 16 Oct 2026 07:21:35 PM (IST)
जल संरक्षण और महिला उद्यमिता से खेती को मिला नया आधार, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में टीकमगढ़ सम्मानित
जतारा का मधुमक्खी पालन केंद्र महिलाओं की आय का नया स्रोत बना है। फोटो सौजन्यः जिला प्रशासन

HighLights

  1. 10 किमी जल प्रणाली का जीर्णोद्धार
  2. प्राकृतिक खेती से घटी लागत
  3. महिला किसानों ने बढ़ाई आय

नईदुनिया प्रतिनिधि, टीकमगढ़। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में टीकमगढ़ जिले ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। सोमवार को दिल्ली में सम्मानित होने वाले जिलों में टीकमगढ़ भी शामिल था। जिले में इस योजना के तहत कृषि उत्पादन बढ़ाने, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और किसानों की आय के वैकल्पिक साधन विकसित करने के लिए कई नवाचार किए गए हैं।

विशेषता यह रही

इनकी विशेषता यह रही कि यहां खेती की समस्याओं के समाधान को सिंचाई, तकनीक, सहकारिता और महिला उद्यमिता से जोड़कर काम किया गया। बता दें, टीकमगढ़ के साथ डिंडौरी, उमरिया और सीधी को भी पुरस्कृत किया गया।

10 किमी जल प्रणाली का जीर्णोद्धार

जिले में खरीफ सीजन में 2.30 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 10 हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में फसल आच्छादन दर्ज किया गया। उड़द, तिल और मूंग जैसी फसलों को बढ़ावा देकर फसल विविधीकरण की दिशा में प्रयास किए गए। वहीं, लगभग 99.9 प्रतिशत गांवों के भू-संदर्भित नक्शे तैयार होने से कृषि और राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता को मजबूती मिली। साथ ही, जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत करीब 10 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक जल प्रणाली का जीर्णोद्धार किया गया।


इससे पठा तालाब, महेंद्र सागर, वृंदावन सागर और हनुमान सागर जैसी जल संरचनाओं को फिर से उपयोगी बनाने में मदद मिली। इसके परिणामस्वरूप 200 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचाई के दायरे में आई। जिले में गेहूं उत्पादन भी 6.12 लाख टन से बढ़कर 6.92 लाख टन तक पहुंचा।

प्राकृतिक खेती से लागत घटाई गई

टीकमगढ़ में पांच हजार से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से और करीब दो हजार किसान जैविक खेती से जुड़े हैं। लिधौराताल की महिला किसान गुड्डी देवी ने जैव संसाधन केंद्र की मदद से खेती की लागत 27 हजार से घटाकर सात हजार रुपये कर ली। यह उदाहरण बताता है कि स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल से किसानों का खर्च कम किया जा सकता है।

खेती के साथ आय के दूसरे रास्ते भी अपनाए

जतारा महिला किसान उत्पादक कंपनी से 1200 से अधिक महिला किसान मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन से जुड़ी हैं। मत्स्य पालन में 529 इकाइयों को सहायता देकर निर्धारित लक्ष्य का 115 प्रतिशत हासिल किया गया। जिले की सभी 64 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण और ई-पैक्स के माध्यम से ऋण वितरण भी कृषि व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने का सफल प्रयास रहा।