
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : कालभैरव मंदिर में दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को बाहर निकलने के लिए अब मुख्य द्वार तक लौटने की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए शिप्रा नदी की ओर मंदिर की दीवार खोलकर करीब 200 फीट लंबा मिनी ब्रिज बनाया जा रहा है।
लोहे के पाइप और गर्डर से तैयार हो रहे इस ब्रिज के ऊपर पारदर्शी शेड लगाया जाएगा। इसके शुरू होने पर मुख्य द्वार से प्रवेश और नदी की ओर बने मार्ग से निकास की व्यवस्था की जा सकेगी। सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर में भीड़ प्रबंधन के लिए यह व्यवस्था की जा रही है।
कहा गया है कि मिनी ब्रिज पर श्रद्धालुओं को धूप और बारिश से बचाने के लिए मजबूत शीट के साथ पारदर्शी शेड लगाया जाएगा। निर्माण शुरू हो चुका है और करीब 20 फीट ढांचा तैयार होने की जानकारी दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, दीपावली के बाद इसे श्रद्धालुओं के लिए शुरू करने की संभावना है।
यहां से बाहर निकलने वाले श्रद्धालु विक्रांत भैरव और गढ़कालिका मार्ग की ओर जा सकेंगे। अलग निकास मार्ग बनने से मंदिर के मुख्य द्वार पर आमने-सामने होने वाली आवाजाही कम करने में मदद मिलेगी। मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए पुराने और जर्जर बैरिकेड हटाकर नए फाइबर बैरियर लगाए गए हैं।
भीड़ का दबाव नियंत्रित करने के लिए श्रद्धालुओं को तय समय स्लाट के अनुसार चरणबद्ध तरीके से प्रवेश दिया जा रहा है। मंदिर परिसर और गर्भगृह के आसपास एक साथ अधिक लोगों के पहुंचने से होने वाली परेशानी कम करना इसका उद्देश्य है।
सिंहस्थ-2028 को देखते हुए कालभैरव मंदिर क्षेत्र को व्यापक स्तर पर विकसित करने की योजना है। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से 50 बीघा भूमि पर कालभैरव लोक विकसित किया जाना प्रस्तावित है। उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से प्रस्तावित परियोजना में आधुनिक फेसिलिटी सेंटर, बहुमंजिला पार्किंग, यात्री धर्मशालाएं और नई अप्रोच रोड जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
मिनी ब्रिज से जहां निकास व्यवस्था बेहतर बनाने की तैयारी है, वहीं कालभैरव लोक के विकास से भविष्य में बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप सुविधाएं जुटाने का लक्ष्य है। सिंहस्थ के दौरान इन व्यवस्थाओं की उपयोगिता निर्माण समय पर पूरा होने और प्रवेश, निकास व पार्किंग के बेहतर समन्वय पर निर्भर करेगी।
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