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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 11, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bhairavgarh Print Ujjain: भैरवगढ़ प्रिंट कला 100 वर्ष पुरानी, जीआइ टैग मिलने से खुले समृद्धि के द्वार

Bhairavgarh Print Ujjain: अब उत्पाद के प्रोत्साहन के लिए जमीन व बैंक से कर्ज की अपेक्षा।

By Hemant Kumar UpadhyayEdited By: Hemant Kumar Upadhyay
Publish Date: Tue, 11 Apr 2023 10:37:23 PM (IST)Updated Date: Tue, 11 Apr 2023 10:37:23 PM (IST)
Bhairavgarh Print Ujjain:  भैरवगढ़ प्रिंट कला 100 वर्ष पुरानी, जीआइ टैग मिलने से खुले समृद्धि के द्वार

Bhairavgarh Print Ujjain: उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कपड़ों पर बटिक प्रिंट के लिए देशभर में प्रसिद्द रही भैरवगढ़ प्रिंट कला को जीआइ टैग मिलने से यहां के ढाई हजार घरों में समृद्धि के द्वार खुल गए हैं। कलाकाराें ने अपनी कला को और अधिक ऊंचाई पर पहुंचाने का सपना संजोया है।

सरकार से सिर्फ तीन अपेक्षा की है। एक- सिंहस्थ क्षेत्र से भैरवगढ़ को मुक्त करना, दूसरी- अपने उत्पाद के प्रोत्साहन के लिए जमीन उपलब्ध कराना, तीसरी- बैंक से कर्ज दिलाना। ये अपेक्षाएं पूरी हुई तो निश्चित ही विश्व पटल पर भैरवगढ़ प्रिंट का नाम सुनहरे अक्षरों में चमकेगा।


मालूम हो कि एक दिन पहले ही वाणिज्य मंत्रालय ने उज्जैन की प्रसिद्ध भैरवगढ़ प्रिंट को जीआइ टैग प्रदान किया है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इसके लिए कलाकारों और उज्जैनवासियों को बधाई दी है। उन्होंने इसे गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।

जीआइ टैग मिलने के बाद ‘नईदुनिया’ ने भैरवगढ़ क्षेत्र और बटिक कार्य करने वाले लोगों से चर्चा की। 60 के दशक से बटिक का काम कर रहे 85 वर्षीय अब्दुल रहीम गुट्टी को क्षेत्रीय लोगों ने भैरवगढ़ प्रिंट का आधुनिक जन्मदाता बताया। उन्‍होंने कहा कि बटिक कार्य करने वाले अधिकांश लोग भैरवगढ़ में ही रहते हैं। मोम को पिघलाकर कपड़ों पर एक खास तरह की हाथ से प्रिंटिंग करना कई लोगों का पुश्तैनी काम है। बाहर के लोगों ने इस कार्य को काफी सराहा। वक्त के साथ नई पीढ़ी का इस कार्य में रूझान जरूर कम हुआ, लेकिन हैंडलूम का चलन बढ़ने से वे इस तरफ लौटे हैं। इस कला में नित नए प्रयोग हो रहे हैं। वर्तमान में 80 हैंडलूम भैरवगढ़ में संचालित हैं।

उत्पाद के प्रचार प्रसार में प्रशासन ने की मददभैरवगढ़ प्रिंट के उत्पाद के विक्रय और प्रचार-प्रसार के लिए स्थानीय प्रशासन ने कई मर्तबा मदद की है। महाकालेश्वर मंदिर, रेलवे स्टेशन परिसर सहित विभिन्न मेलों, बाजारों में पर्याप्त जगह तक उपलब्ध कराई है। कुछ को शासकीय योजना का लाभ भी दिलाया है।